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फूटा रैयतों का गुस्सा: आम्रपाली कोल परियोजना के शिवपुर साइडिंग में चक्का जाम, टेंट लगाकर सड़क पर बैठे विस्थापित

On: May 30, 2026 9:55 AM
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एनसीसी, वेरिएंट और एवीएस कंपनियों की कोयला ढुलाई पूरी तरह ठप; 2021 की त्रिपक्षीय वार्ता के बाद भी नहीं मिला मुआवजा और रोजगार, बाहरी लोगों को काम देने का आरोप

न्यूज स्केल लाइव, चतरा (टंडवा)

टंडवा (चतरा): टंडवा प्रखंड अंतर्गत आम्रपाली कोल परियोजना के शिवपुर रेलवे साइडिंग में शुक्रवार को विस्थापित और प्रभावित रैयतों का जोरदार गुस्सा फूट पड़ा। सीसीएल प्रबंधन और आउटसोर्सिंग कंपनी एनसीसी के रवैये के विरुद्ध आक्रोशित दर्जनों रैयतों ने उग्र नारेबाजी की और मुख्य सड़क पर टेंट लगाकर धरने पर बैठ गए। रैयतों के इस अचानक चक्का जाम से आउटसोर्सिंग कंपनी एनसीसी, वेरिएंट और एवीएस द्वारा की जा रही कोयले की ढुलाई पूरी तरह से ठप हो गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह आक्रोश किसी तात्कालिक विवाद का हिस्सा नहीं है, बल्कि पिछले कई सालों से जिला प्रशासन और सीसीएल प्रबंधन द्वारा की जा रही वादाखिलाफ़ी का नतीजा है।

वर्ष 2021 की त्रिपक्षीय वार्ता का ‘धोखा’

विदित हो कि वर्ष 2021 में रैयतों के एक जोरदार आंदोलन के बाद अनुमंडल कार्यालय (एसडीओ सिमरिया की अध्यक्षता) में त्रिपक्षीय वार्ता हुई थी। बैठक के बाद ज्ञापांक 199 दिनांक 9 मार्च 2021 के तहत कई मांगों पर सहमति पत्र जारी कर रैयतों को आश्वासन दिया गया था। लेकिन आंदोलनकारियों का आरोप है कि वह सहमति पत्र सिर्फ ग्रामीणों को गुमराह करने का जरिया था, क्योंकि इतने साल बीत जाने के बाद भी एक भी शर्त धरातल पर पूरी नहीं हुई।

दस्तावेजों और धरातल पर विभागीय लापरवाही उजागर

रैयतों के पास मौजूद सरकारी दस्तावेजों और जमीनी हकीकत को देखें, तो विभागीय लापरवाही साफ बयां होती है:

  • मुआवजा और सीमांकन ठप: सहमति पत्र में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने लिखित आश्वासन दिया था कि अंचल अधिकारी टंडवा से समन्वय बनाकर रैयती जमीनों का सीमांकन कराया जाएगा और तत्काल मुआवजा दिया जाएगा, जो आज तक अधूरा है।

  • रेलवे लाइन में गई जमीन, हक से महरूम: रेलवे लाइन के निर्माण में छलावे के शिकार हुए रैयतों की जमीनों को तो मिला लिया गया, लेकिन आज भी वे मुआवजे और रोजगार के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।

  • रोजगार की कागजी घोषणा: तत्कालीन सीसीएल महाप्रबंधक द्वारा विस्थापित युवाओं को रोजी-रोजगार में प्राथमिकता देने की लिखित घोषणा की गई थी, लेकिन विस्थापित युवा आज भी ठोकरें खा रहे हैं।

बाहरी लोगों को तरजीह, स्थानीय हो रहे दरकिनार: मुखिया

स्थानीय लमटा/टंडवा क्षेत्र की मुखिया सरिता देवी की मानें तो एनसीसी और उसकी सहायक ठेका कंपनियों द्वारा क्षेत्र के प्रभावित और परेशान रैयतों को पूरी तरह दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नियम-कानूनों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर बाहरी लोगों को अवैध तरीके से रोजगार दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं में भारी असंतोष है।

कोयले की धूल से बर्बाद हो रही सेहत और फसलें

आंदोलन में शामिल दशरथ महतो ने बताया कि साइडिंग के किनारे कई आवासीय मकान हैं, जहाँ चौबीसों घंटे उड़ने वाले कोयले के धूलकणों से ग्रामीणों के स्वास्थ्य और खेतों की फसलों पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है। इसके अलावा, रेलवे लाइन के दूसरे छोर पर मौजूद अपने ही खेतों में जाने के लिए पुल से रास्ता बनाने की प्रशासनिक प्रतिबद्धता भी पूरी तरह खोखली साबित हुई है।

डीसी को पत्र देने के बाद भी नहीं हुई पहल, आर-पार की लड़ाई

ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर पिछले दिनों 16 मई को चतरा उपायुक्त (DC) रवि आनंद समेत सीसीएल प्रबंधन व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित पत्र सौंपकर समुचित संज्ञान लेने का आग्रह किया गया था। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई, जिससे क्षुब्ध होकर रैयतों को यह कदम उठाना पड़ा।

बैनर-तख्तियों के साथ डटे हैं रैयत:

खबर लिखे जाने तक घटनास्थल पर सुबोध ठाकुर, किशुन महतो, प्रभु महतो, सोनी देवी, बसंती देवी, सोनमती देवी, मुनिया देवी समेत दर्जनों रैयत हाथों में तख्ती और बैनर लिए टेंट के नीचे डटे हुए थे। रैयतों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित कार्रवाई शुरू नहीं होती, तब तक आर्थिक चक्का जाम जारी रहेगा।

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