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कुदरत का कहर: तेज आंधी-बारिश के साथ गिरा ठनका, मलबे की तरह गिरी दुधारू भैंस; पशुपालक को भारी आर्थिक क्षति

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वज्रपात से ₹40 हजार की दुधारू भैंस की मौके पर ही मौत, खूंटा तोड़कर भागे अन्य मवेशी; पीड़ित ने प्रशासन से लगाई आपदा मुआवजे की गुहार

न्यूज स्केल लाइव, चतरा (हंटरगंज)

हंटरगंज (चतरा): जिले के हंटरगंज प्रखंड क्षेत्र में शुक्रवार की सुबह मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। तेज आंधी और मूसलाधार बारिश के साथ हुए भीषण वज्रपात (ठनका) की चपेट में आने से एक दुधारू पशु (भैंस) की मौके पर ही मौत हो गई। इस प्राकृतिक आपदा के कारण कई स्थानों पर बड़े पेड़ भी उखड़ गए हैं। यह दर्दनाक घटना हंटरगंज के नावाडीह पनारी गांव की है, जहाँ देवी स्थान के समीप पंचायत सचिवालय के पास एक पेड़ के नीचे मवेशी बंधे हुए थे।

आँखों के सामने तड़पकर गिरी भैंस, खूंटा तोड़ भागे अन्य मवेशी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नावाडीह पनारी निवासी मुंशी यादव के 4 से 5 मवेशी रोज की तरह पंचायत सचिवालय के पास पेड़ के नीचे बंधे थे। इसी दौरान अचानक आसमान में घने बादल छा गए और तेज गर्जना के साथ वज्रपात हुआ। ठनका सीधे उसी पेड़ के पास गिरा, जिसकी चपेट में आने से एक दुधारू भैंस की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वज्रपात इतना भयानक था कि पास ही बंधे अन्य चार मवेशी डर के मारे खूंटा और रस्सी तोड़कर जान बचाकर भाग निकले। मृत भैंस की अनुमानित कीमत लगभग 40 हजार रुपये बताई जा रही है।

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आजीविका का इकलौता साधन छीना, परिवार सहमा

घटना के संबंध में रोते हुए पीड़ित पशुपालक मुंशी यादव ने बताया: “सुबह अचानक तेज आंधी और कड़कड़ाहट के साथ बारिश शुरू हुई, जिससे पूरा परिवार सहम गया था। हम लोग कुछ समझ पाते या मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर हटा पाते, उससे पहले ही एक जोरदार आवाज हुई और हमारी दुधारू भैंस जमीन पर गिर पड़ी।” मुंशी यादव ने बताया कि यह भैंस उनके परिवार की आय का मुख्य जरिया थी, जिससे दूध बेचकर उनके घर का गुजारा चलता था। इस हादसे से उनके सामने अचानक गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

आपदा राहत कोष से मुआवजे की मांग

इस घटना के बाद नावाडीह पनारी गांव के ग्रामीणों में पीड़ित परिवार के प्रति गहरी सहानुभूति है। पीड़ित मुंशी यादव ने प्रखंड प्रशासन और अंचल अधिकारी से आपदा राहत कोष के तहत अविलंब क्षतिपूर्ति (मुआवजा) देने की मांग की है। वहीं, स्थानीय ग्रामीणों ने भी जिला प्रशासन से अपील की है कि ऐसे गरीब और आपदा पीड़ित किसान को त्वरित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, ताकि वे अपने जीवनयापन के साधन को दोबारा खड़ा कर सकें।

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