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सरकारी राशि का दुरुपयोग: लाखों की लागत से बनी 10 सोलर जलमीनारें खराब, 6 से तो आज तक नहीं टपका एक बूंद पानी!

On: May 29, 2026 10:45 PM
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भीषण गर्मी के बीच गहराया पेयजल संकट; पंसस और समाजसेवी ने कार्यपालक अभियंता को लिखा पत्र, बीडीओ ने दिया कार्रवाई का भरोसा

न्यूज स्केल लाइव, चतरा (लावालौंग)

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जलापूर्ति योजना के तहत वर्ष 2021-22 में चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड अंतर्गत लमटा पंचायत के विभिन्न टोलों में स्थापित की गई सोलर संचालित जलमीनारें आज ग्रामीणों के लिए राहत के बजाय परेशानी का सबब बन चुकी हैं। देखरेख और विभागीय निगरानी के अभाव में पंचायत की करीब 10 जलमीनारें पूरी तरह खराब पड़ी हैं। इनमें से 6 जलमीनारें तो ऐसी हैं जो निर्माण के बाद से आज तक कभी चालू ही नहीं हुईं और उनसे ग्रामीणों को एक बूंद पानी तक मयस्सर नहीं हो सका है।

इस गंभीर समस्या को लेकर लमटा पंचायत की पंचायत समिति सदस्य (पंसस) रूबी देवी ने पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, चतरा के कार्यपालक अभियंता को एक पत्र लिखा है। पत्र के माध्यम से उन्होंने सभी खराब जलमीनारों की तत्काल तकनीकी जांच कराने और उन्हें अविलंब मरम्मत कर चालू करने की मांग की है। इस जन-जागरूकता और सुधार अभियान में स्थानीय शिक्षक सह समाजसेवी अशोक कुमार पासवान भी सक्रिय रूप से ग्रामीणों का सहयोग कर रहे हैं। वहीं, मामले पर संज्ञान लेते हुए लावालौंग बीडीओ बिपिन कुमार भारती ने भी समस्या के त्वरित समाधान के लिए पूर्ण प्रशासनिक सहयोग का भरोसा दिया है।

छह महीने में ही हाफ गईं लाखों की योजनाएं

पंसस रूबी देवी द्वारा कार्यपालक अभियंता को भेजे गए पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि अधिकांश जलमीनार निर्माण के महज छह महीने के भीतर ही तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गए। वर्तमान में स्थिति यह है कि पूरी पंचायत की लगभग सभी जलमीनारें शो-पीस बनकर खड़ी हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि संवेदक और विभाग की घोर लापरवाही के कारण लाखों रुपये की सरकारी राशि पानी में बह गई और धरातल पर योजनाएं बेकार साबित हो रही हैं।

भीषण गर्मी और गिरते जलस्तर के बीच बूंद-बूंद को तरस रहे लोग

इस समय चतरा जिले में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के कारण क्षेत्र का जलस्तर (Water Level) काफी नीचे चला गया है, जिससे पारंपरिक जलस्रोत सूख रहे हैं। ऐसे संकट के समय में ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए कोसों दूर भटकना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार की ये जलमीनारें चालू होतीं, तो इस तपती गर्मी में लोगों को भारी राहत मिलती। लेकिन जिन योजनाओं से जीवन आसान होना था, वे खुद वर्षों से विभागीय उदासीनता के मलबे के नीचे दबी पड़ी हैं।

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बड़ी लापरवाही: खुली छोड़ दी गईं टंकियां, मंडरा रहा बड़ा खतरा

ग्रामीणों ने योजना के क्रियान्वयन पर बेहद गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि निर्माण के वक्त सभी जलमीनारों की टंकियों को ऊपर से खुला ही छोड़ दिया गया था। ढक्कन न होने के कारण टंकियों में पक्षियों के गिरने और उनके सड़ने-मरने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

ग्रामीणों की बड़ी आशंका: स्थानीय लोगों का कहना है कि इस घोर लापरवाही के कारण कोई भी बड़ी दुर्घटना घट सकती है। यदि कोई असामाजिक तत्व खुली टंकी में कोई जहरीला या हानिकारक पदार्थ डाल दे, तो पूरे टोले के लोग काल के गाल में समा सकते हैं। यह स्थिति निर्माण और रखरखाव में बरती गई आपराधिक लापरवाही को साफ उजागर करती है।

उपायुक्त तक पहुंचा मामला; जांच और जवाबदेही तय करने की मांग

मामले की संवेदनशीलता और जनता की परेशानी को देखते हुए इस शिकायत पत्र की प्रतिलिपि चतरा उपायुक्त (DC) रवि आनंद को भी सूचनार्थ भेजी गई है। पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि:

  1. सभी 10 बंद पड़ी जलमीनारों की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच (Technical Audit) कराई जाए।

  2. जिन 6 जलमीनारों से आज तक पानी नहीं निकला, उनकी गुणवत्ता की जांच कर दोषी एजेंसियों और जिम्मेदार पदाधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

  3. क्षेत्र में जारी पेयजल संकट को देखते हुए सभी खराब पड़े ढांचों को युद्धस्तर पर ठीक कराकर पुनः संचालित किया जाए।

अब देखना यह होगा कि विभागीय अधिकारी इस गंभीर पेयजल संकट और लाखों के घोटाले की शिकायत पर कितनी जल्दी संज्ञान लेते हैं। लमटा पंचायत की जनता फिलहाल प्रशासनिक कार्रवाई की आस लगाए बैठी है।

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