25 मई से शुरू होकर 2 जून तक चलेगा नौतपा; तेज गर्मी से नष्ट होंगे फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक कीट-पतंग, प्रकृति के संतुलन का है काल
न्यूज स्केल लाइव, चतरा
चतरा: भीषण गर्मी के इस दौर में ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों ‘नौतपा’ को लेकर चर्चा काफी तेज हो गई है। परंपरागत और सनातन मान्यताओं के अनुसार, नौतपा के दौरान पड़ने वाली अत्यधिक गर्मी और उमस का सीधा संबंध आने वाले मानसून और अच्छी बारिश से माना जाता है। मौसम विशेषज्ञ भले ही मानसून के आगमन को कई तरह के आधुनिक वैज्ञानिक कारकों पर निर्भर बताते हों, लेकिन ग्रामीण समाज और किसानों के बीच नौतपा का विशेष महत्व सदियों से आज भी अटूट बना हुआ है।
25 मई से 2 जून तक रहेगा नौतपा का प्रभाव
प्रसिद्ध आचार्य अमित कुमार मिश्रा ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि जब सूर्यदेव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब से नौतपा की शुरुआत होती है। इस वर्ष 25 मई को सूर्य ने रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश किया है, जिसके साथ ही नौतपा का प्रारंभ हो चुका है। यह विशेष खगोलीय और ज्योतिषीय स्थिति नौ दिनों तक यानी 2 जून तक प्रभावी रहेगी। चूंकि यह अत्यंत उच्च तापमान और शुष्क वातावरण वाली कुल 9 दिनों की अवधि होती है, इसीलिए इसे आम बोलचाल में “नौतपा” कहा जाता है।
तेज गर्मी अच्छे मानसून का संकेत, बारिश हुई तो बढ़ेगी चिंता
आचार्य अमित कुमार मिश्रा के अनुसार, ज्योतिषीय और पारंपरिक गणना कहती है कि नौतपा में यदि रिकॉर्डतोड़ धूप और भीषण गर्मी पड़ती है, तो इसे एक बेहतरीन और समृद्ध मानसून का संकेत माना जाता है। इसके विपरीत, यदि इन 9 दिनों के दौरान लगातार बारिश या ठंडी हवाएं चलती हैं, तो मानसून के कमजोर या असंतुलित होने की आशंका प्रबल हो जाती है।
भारतीय परंपरा में नौतपा को केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि प्रकृति के ‘शोधन काल’ (प्यूरीफिकेशन पीरियड) के रूप में देखा गया है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस दौरान भूमि के अत्यधिक गर्म होने से ‘लो प्रेशर एरिया’ (कम दबाव का क्षेत्र) बनता है, जो मानसूनी हवाओं को आकर्षित करने में बड़ी सहायता प्रदान करता है।
खेती-किसानी के लिए वरदान है नौतपा की तपन
कृषि प्रधान चतरा जिले और इसके ग्रामीण क्षेत्रों में यह पुरखों से मान्यता चली आ रही है कि नौतपा की भीषण तपन खेतों के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करती है।
हानिकारक कीटों का खात्मा: इस दौरान पड़ने वाली तेज धूप और झुलसाने वाली गर्मी खेतों में मौजूद कई तरह के हानिकारक कीट-पतंगों, फफूंद (Fungus) और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले अन्य रोगजनकों को नष्ट कर देती है।
जीवन चक्र पर असर: हालांकि सभी जीवाणु और विषाणु केवल गर्मी से समाप्त नहीं होते, फिर भी शुष्क वातावरण और उच्च तापमान कई हानिकारक जीवों के जीवन चक्र (Life Cycle) को तोड़ देता है, जिससे आने वाली फसल को बीमारी का खतरा कम रहता है।
यही कारण है कि हमारे किसान भाई नौतपा की स्थिति और बादलों की आवाजाही पर पैनी नजर रखकर आगामी खरीफ फसल (खेती-किसानी) की तैयारियों और बीजों के रख-रखाव का अग्रिम अनुमान लगाते हैं। कुल मिलाकर, नौतपा इस समय न केवल मौसम बल्कि कृषि और पर्यावरण के संदर्भ में भी चौपालों पर चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है।






















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