लकड़ी चुनकर लौट रही थीं प्रियांशु और रेशमा, रातभर तलाश के बाद बुधवार सुबह पानी में मिले शव; एसडीपीओ बोले— “पोस्टमार्टम के बाद की जा रही है कानूनी कार्रवाई”, ग्रामीणों ने की तालाब की घेराबंदी की मांग
झारखंड के गढ़वा जिले अंतर्गत नगर उंटारी थाना क्षेत्र में चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बीच एक बेहद ही विदारक और रोंगटे खड़े कर देने वाला दर्दनाक हादसा घटित हुआ है। पतरिहा कलां गांव के हरिजन टोला में दो मासूम बच्चियां जो सुबह घर से मुस्कुराते हुए लकड़ी चुनने निकली थीं, वे वापस जीवित नहीं लौट सकीं। दोपहर की प्रचंड तपिश और प्यास से राहत पाने के उद्देश्य से दोनों सहेलियां गांव के एक तालाब में नहाने उतरी थीं, जहाँ गहरे पानी के दलदल में समा जाने के कारण दम घुटने से दोनों की मौके पर ही जल-समाधि हो गई।
इस भयंकर दोहरी मौत की खबर के बाद से पूरे हरिजन टोला सहित पतरिहा कलां गांव में चूल्हे नहीं जले हैं और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बहवा पहाड़ पर गई थीं प्रियांशु और रेशमा; रातभर जंगलों में भटकते रहे परिजन
प्राप्त आधिकारिक और जमीनी विधिक जानकारी के अनुसार, मृत बच्चियों की पहचान हरिजन टोला निवासी राजू राम की 8 वर्षीय पुत्री प्रियांशु कुमारी तथा परमेश्वर राम की 10 वर्षीय पुत्री रेशमा कुमारी के रूप में की गई है।
इस हृदयविदारक हादसे की पूरी केस हिस्ट्री इस प्रकार है:
सुबह 9:00 बजे प्रस्थान: मंगलवार की सुबह करीब 9:00 बजे दोनों मासूम बच्चियां रोज की तरह खाना पकाने की सूखी लकड़ियां बीनने के लिए पास के ही बहवा पहाड़ की ओर गई थीं।
परिजनों की बढ़ी चिंता: बच्चियों ने पहाड़ से सूखी लकड़ियां तो चुन लीं, लेकिन दोपहर बीतने और देर शाम होने के बाद भी जब दोनों घर वापस नहीं लौटीं, तो परिजनों की चिंता बढ़ गई। इसके बाद परिवार के लोग और भारी संख्या में ग्रामीण रातभर हाथ में टॉर्च लेकर जंगलों, पहाड़ों और आसपास के अंचलों में उन्हें ढूंढते रहे, परंतु रात के घने अंधेरे में उनका कहीं कोई सुराग नहीं मिला।
सुबह बच्चों ने तालाब में देखे तैरते शव; चीख-पुकार के बीच बाहर निकाली गईं लाशें
बुधवार की अलसुबह गांव के कुछ अन्य बच्चे जब शौच और घूमने के लिए स्थानीय तालाब की ओर गए, तो उनकी नजर पानी की सतह पर तैरते दो शवों पर पड़ी। बच्चों के शोर मचाने पर गांव में अफरा-तफरी मच गई और देखते ही देखते सैकड़ों ग्रामीणों की भारी भीड़ तालाब के घाट पर जमा हो गई।
ग्रामीणों ने तुरंत पानी के भीतर उतरकर दोनों बच्चियों के शवों को बाहर निकाला। दोनों सहेलियों के बेजान और फूले हुए शवों को देखकर माताओं और परिजनों की चीख-पुकार से पूरा इलाका दहल उठा। ग्रामीणों के अनुसार, पहाड़ से भारी बोझ लेकर लौटने के क्रम में भीषण गर्मी और प्यास की वजह से दोनों बच्चियां तालाब में पैर धोने या नहाने उतरी थीं और गहराई का सही विधिक अंदाजा न होने के कारण गहरे पानी में समा गईं।
पहले भी कई लोगों को लील चुका है यह ‘खूनी तालाब’; अरुण तिवारी ने उठाए सवाल
इस दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों का भारी आक्रोश फूट पड़ा है। गांव के प्रबुद्ध नागरिक अरुण तिवारी ने न्यूज़ स्केल लाइव से बात करते हुए एक बड़ा और गंभीर खुलासा किया है।
उन्होंने बताया: “इस तालाब में सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं. इससे पहले भी यहाँ कई बड़े हादसे हो चुके हैं और कई मासूम बच्चों व ग्रामीणों की जान इस गहरे पानी में डूबने से जा चुकी है. बार-बार गुहार लगाने के बाद भी प्रखंड प्रशासन सोया हुआ है.”
कूद गांव और पतरिहा कलां के ग्रामीणों ने चतरा और गढ़वा जिला प्रशासन से कड़क मांग की है कि इस खतरनाक तालाब के चारों ओर अविलंब विधिक कंक्रीट घेराबंदी (बाउंड्रीवॉल) कराई जाए, घाट पर ‘गहरा पानी-खतरा’ का चेतावनी बोर्ड लगाया जाए तथा सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए ताकि भविष्य में किसी और गरीब का चिराग इस तरह न बुझ सके।
शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए; विधिक जांच में जुटी नगर उंटारी पुलिस
हादसे की संवेदनशील सूचना मिलते ही नगर उंटारी थाना पुलिस दलबल और सशस्त्र जवानों के साथ तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों शवों को अपने विधिक कस्टडी में लेकर पंचनामा तैयार किया और अंत्यपरीक्षण (पोस्टमार्टम) के लिए सदर अस्पताल गढ़वा सुरक्षित भेज दिया है।
मामले की आधिकारिक पुष्टि करते हुए एसडीपीओ सतेंद्र सिंह ने बताया कि दोनों बच्चियों की मौत पानी में डूबने से हुई है। पुलिस की एक विशेष विंग पूरे घटनास्थल की बारीकी से जांच कर रही है और परिजनों के विधिक बयान के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।




















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