महा-बैठक कर बरवाडीह, सिंघानी, नोनगांव और मेराल के ग्रामीणों ने खोला मोर्चा। बोले— “30 राजस्व गांवों की 30 हजार आबादी की बिजली व्यवस्था से खिलवाड़ मंजूर नहीं”; सांसद प्रतिनिधि और चंद्रमणि यादव के नेतृत्व में एकजुटता
पत्थलगड़ा (चतरा) | न्यूज स्केल लाइव
चतरा जिले के पत्थलगड़ा प्रखंड क्षेत्र में भीषण गर्मी के बीच अब बिजली आपूर्ति और फीडर विभाजन को लेकर एक नया और बड़ा विरूप जन-आक्रोश सुलग उठा है। पत्थलगड़ा प्रखंड के नावाडीह व बाजोबार के ग्रामीणों द्वारा अपने इलाके के लिए एक बिल्कुल ‘अलग विद्युत फीडर’ बनाए जाने की उठाई जा रही मांग का अब प्रखंड की चार बड़ी पंचायतों के ग्रामीणों ने एक सुर में कड़ा और पुरजोर विरोध शुरू कर दिया है।
इस मांग के खिलाफ अपनी कड़क सामूहिक एकजुटता दिखाते हुए चारों पंचायतों के प्रबुद्ध नागरिकों ने चतरा विद्युत कार्यपालक अभियंता (EE), विद्युत आपूर्ति प्रमंडल को एक आधिकारिक और विधिक आवेदन सौंपकर नावाडीह के प्रस्ताव को तुरंत निरस्त करने की गुहार लगाई है।
गांधी चौक पर जुटी भारी भीड़; 30 राजस्व गांवों की 30 हजार आबादी के हक की लड़ाई
बिजली के इस गंभीर आंतरिक विवाद को लेकर मंगलवार को पत्थलगड़ा मुख्यालय स्थित गांधी चौक पर एक विशाल विरोध बैठक आहूत की गई। इस बैठक में बरवाडीह, सिंघानी, नोनगांव व मेराल पंचायत के कोने-कोने से भारी संख्या में किसान, व्यवसायी और आम उपभोक्ता पूरी मुस्तैदी के साथ शामिल हुए।
बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने कड़े लहजे में कहा कि पत्थलगड़ा प्रखंड के इन चारों मुख्य पंचायतों के अंतर्गत लगभग 30 राजस्व गांव आते हैं, जिनकी कुल आबादी करीब 30,000 (30 हजार) के पार है। वर्तमान में पूरा क्षेत्र एक सुव्यवस्थित चैन से जुड़ा हुआ है। ऐसे में नावाडीह के कुछ ग्रामीणों द्वारा अपने स्वार्थ के लिए अलग विद्युत फीडर की मांग करना पूरी तरह से अनुचित, अव्यावहारिक और गैर-विधिक है, जिससे पूरी व्यवस्था चरमरा जाएगी।
इसी लाइन से चलते हैं थाना, ब्लॉक, अस्पताल और कस्तूरबा स्कूल; सिमरिया के गांव भी जुड़े
विद्युत कार्यपालक अभियंता को सौंपे गए कड़क आवेदन में ग्रामीणों ने भौगोलिक और प्रशासनिक संकट का खाका खींचते हुए मुख्य विधिक तर्क सामने रखे हैं:
मुख्य प्रशासनिक हब: विरोध करने वाले ग्रामीणों ने बताया कि इन्हीं चारों पंचायत क्षेत्रों के भीतर पत्थलगड़ा प्रखंड कार्यालय (Block Office), स्थानीय थाना (Police Station), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) एवं कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय स्थित हैं, जिससे किसी एक गांव के लोग नहीं बल्कि समूचे प्रखंड के गरीब लोग लाभान्वित होते हैं।
अंतर-प्रखंड निर्भरता: इस मुख्य विद्युत व्यवस्था से न केवल पत्थलगड़ा बल्कि पड़ोसी सिमरिया प्रखंड के हुरनाली पंचायत के तपसा, उरूब, हांडे, बारा व हुडमुड आदि महत्वपूर्ण गांव भी सीधे जुड़े हुए हैं।
कमर्शियल हब: पत्थलगड़ा प्रखंड का मुख्य डेली मार्केट (सब्जी मंडी) और सभी प्रमुख व्यावसायिक प्रतिष्ठान एवं दुकानें भी इसी फीडर लाइन के रडार में आती हैं।
यही कारण है कि नावाडीह के लिए अलग फीडर अलॉट करने से पूरे प्रखंड की लाइफलाइन बिजली व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी। ग्रामीणों ने बिजली विभाग से साफ मांग की है कि नावाडीह के लोगों के इस प्रस्ताव को बिना किसी विधिक लेटलतीफी के तुरंत खारिज (निरस्त) किया जाए और पूरे पत्थलगड़ा प्रखंड में बिना किसी भेदभाव के समान व निर्बाध रूप से विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
विद्युत विभाग के खिलाफ और अपनी मांगों के समर्थन में गांधी चौक पर मुख्य रूप से निम्नलिखित जनप्रतिनिधि और प्रबुद्ध नागरिक मुस्तैद रहे: आशीष दांगी (सांसद प्रतिनिधि) बीरबल दांगी (पूर्व सांसद प्रतिनिधि) चंद्रमणि यादव (प्रमुख प्रतिनिधि) प्रमोद कुशवाहा, बिशेश्वर कुशवाहा, मिथलेश दांगी, सुरेश दांगी, राजकिशोर तिवारी, मो० कलीम, नवीन कुमार, राजकुमार दांगी, चंद्रदेव दांगी, दिलीप ठाकुर, जगदेव साव, मो० मोहिब और महेश दांगी समेत सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।






















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