स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने नए उपायुक्त, सिविल सर्जन और स्वास्थ्य मंत्री से की उच्चस्तरीय जांच की मांग। ममता वाहन के अवैध भुगतान और प्रसवों की फर्जी सूची की भी होगी विधिक स्क्रूटनी, अंचल अधिकारी का बड़ा निर्देश।
देवीपुर (देवघर) | न्यूज स्केल लाइव
झारखंड के देवघर जिले अंतर्गत देवीपुर प्रखंड से सरकारी फंड की बंदरबांट और स्वास्थ्य महकमे में गहरी वित्तीय अनियमितता (Financial Irregularities) का एक बेहद ही सनसनीखेज व गंभीर मामला सामने आया है। देवीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और विभिन्न स्वास्थ्य उपकेंद्रों में सरकारी नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर लाखों रुपये के गबन का आरोप लगा है।
इस गंभीर प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रबुद्ध नागरिकों और ग्रामीणों ने मोर्चा खोलते हुए सीधे देवघर के नवनियुक्त और कड़क उपायुक्त (DC) कुमार सौरभ भुवानिया, सिविल सर्जन डॉ० राजेश कुमार एवं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी से पूरे मामले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय विधिक जांच कराने की पुरजोर मांग की है। ग्रामीणों ने इस विधिक घोटाले को लेकर जल्द ही उपरोक्त सभी दरबारों में साक्ष्यों के साथ मुकम्मल आवेदन सौंपने की घोषणा की है।
बिना तकनीकी स्वीकृति के हुआ रंग-रोहन; सीओ खोपलाल राम ने तलब किए विधिक दस्तावेज
भ्रष्टाचार के खेल का भंडाफोड़ करते हुए जनप्रतिनिधियों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि पिछले दिनों देवीपुर मुख्य स्वास्थ्य केंद्र सहित क्षेत्र के अन्य उपकेंद्रों में मरम्मती (रिपेयरिंग) एवं रंग-रोहन (पेंटिंग) का कार्य कराया गया था। नियमानुसार किसी भी सरकारी निर्माण या मरम्मत के लिए कनिष्ठ और सहायक अभियंताओं से तकनीकी स्वीकृति (Technical Sanction) लेना अनिवार्य होता है।
लेकिन, यहाँ विभागीय साठगांठ से बिना किसी तकनीकी स्वीकृति के ही सारा कार्य करा दिया गया। हद तो यह है कि बिना किसी मापी पुस्तिका (Measurement Book – MB) के संधारण और भौतिक सत्यापन के ही ठेकेदारों और बिचौलियों के नाम पर सरकारी खजाने से लाखों रुपये की अवैध निकासी (Fund Withdrawal) कर ली गई।
इस मामले को लेकर पंचायत समिति की उच्चस्तरीय बैठक में भी भारी हंगामा हुआ। बैठक में मामले को गंभीरता से लेते हुए देवीपुर अंचल अधिकारी (CO) खोपलाल राम ने कड़ा रुख अपनाया है। सीओ ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (MO In-Charge) देवीपुर को सख्त लहजे में निर्देश जारी किया है कि वे कनीय अभियंता (JE) एवं सहायक अभियंता (AE) द्वारा तैयार किया गया मूल प्राकलन (Estimate) और खर्च से संबंधित प्राकलित राशि के तमाम विधिक दस्तावेज अंचल कार्यालय में अविलंब जमा करें।
ममता वाहन के अवैध भुगतान और फर्जी प्रसव (Delivery) सूची पर भी सुलगते सवाल
जांच की आंच सिर्फ रंग-रोहन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य समिति के अंदरखाने चल रहे कई अन्य काले कारनामों का भी कच्चा चिट्ठा सामने आया है:
ममता वाहन का खेल: नियमों के अनुसार किसी भी प्राइवेट वाहन को ममता वाहन के रूप में अनुबंधित करने के लिए स्वास्थ्य समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित होना अनिवार्य है। लेकिन देवीपुर में चल रहे एक प्राइवेट ममता वाहन को बिना किसी विधिक प्रस्ताव के, किस आधार पर टेंडर देकर रखा गया है और उसे हर महीने सरकारी फंड से भुगतान किया जा रहा है, इसपर बड़ा विधिक सवाल खड़ा हुआ है।
प्रसवों की फर्जी सूची: जनप्रतिनिधियों ने वित्तीय वर्ष 2024 और 2025 के दौरान देवीपुर स्वास्थ्य केंद्र में दर्ज किए गए सभी संस्थागत प्रसवों (Deliveries) की सूची की भी स्क्रूटनी करने की मांग की है। आरोप है कि प्रोत्साहन राशि हड़पने के लिए कागजों पर फर्जी प्रसव दिखाए गए हैं।
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ट्रेजरी घोटाला (Treasury Scam) से जुड़ सकते हैं तार; डीसी से निष्पक्ष जांच की विधिक गुहार
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और विधिक सूत्रों की मानें तो यदि जिला प्रशासन और कड़क उपायुक्त कुमार सौरभ भुवानिया इस पूरे मामले पर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर कड़ाई से जांच करते हैं, तो देवीपुर स्वास्थ्य केंद्र में दर्जनों बड़े वित्तीय घोटाले उजागर हो सकते हैं।
चर्चा तो यहाँ तक आम है कि देवघर के बहुचर्चित ट्रेजरी घोटाले (खजाना गबन मामला) के तार भी कहीं न कहीं देवीपुर स्वास्थ्य केंद्र के फर्जी विपत्रों (Bills) और वाउचरों से जुड़े हो सकते हैं। ग्रामीणों ने उपायुक्त से मांग की है कि किसी भी लीपापोती को स्वीकार न करते हुए, दोषी चिकित्सा अधिकारियों, लिपिकों और बिचौलियों को चिन्हित कर सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाए और उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाए।





















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