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सिस्टम की खुली पोल; करंट की चपेट में आए 2 मासूमों को ले जाने पहुंची 108 एम्बुलेंस खुद हुई बीमार, ग्रामीणों ने लगाया धक्का, फिर भी नहीं हुई स्टार्ट

On: May 26, 2026 7:50 PM
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मरीजों को रेफर किए जाने के बाद मची अफरा-तफरी, थक-हारकर परिजनों ने प्राइवेट एम्बुलेंस से भिजवाया। चालक और चिकित्सा पदाधिकारीका बड़ा बयान— “CS को कई बार कहा, पर फिटनेस को लेकर वे गंभीर नहीं

हंटरगंज (चतरा) | न्यूज स्केल लाइव

झारखंड सरकार और स्वास्थ्य महकमा राज्य की गरीब जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और ऑन-स्पॉट इमरजेंसी रिस्पॉन्स देने के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रहा है। सरकार का दावा है कि सूबे के सभी सुदूरवर्ती स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के लिए हाई-टेक 108 एम्बुलेंस वाहनों की फौज खड़ी की गई है। सरकार ने एम्बुलेंस तो दे दी, लेकिन जब आपातकाल में वो जीवनदायिनी गाड़ी खुद कबाड़ और ‘बीमार’ साबित हो, तो बेबस मरीजों को क्या खाक सुविधा मिलेगी?

कुछ ऐसा ही शर्मनाक और झकझोर देने वाला नजारा सोमवार शाम चतरा जिले के हंटरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में देखने को मिला, जहां मरीजों की सांसें बचाने वाली सरकारी 108 एम्बुलेंस ऐन वक्त पर खुद आईसीयू (ICU) में चली गई। विभागीय लापरवाही के चलते तड़पते मरीजों को धक्के का सहारा लेना पड़ा और आखिर में जेब ढीली कर निजी वाहन का इंतजाम करना पड़ा।

करंट से तड़प रहे थे दो मासूम, गया किया गया था रेफर; अस्पताल पहुंचते ही ठप हुई गाड़ी

धरातल से मिली बेहद विदारक जानकारी के अनुसार, हंटरगंज प्रखंड के फिटिंगटांड गांव निवासी दो मासूम बच्चे सोमवार को अचानक घरेलू बिजली के करंट (हाई-वोल्टेज शॉक) की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए थे। परिजनों ने आनन-फानन में दोनों बच्चों को लहूलुहान स्थिति में हंटरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। प्राथमिक उपचार के बाद दोनों मासूमों की नाजुक और अत्यंत गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर न्यूरो व बर्न इलाज के लिए तत्काल मगध मेडिकल कॉलेज, गया (बिहार) रेफर कर दिया।

परिजनों ने बिना एक पल गंवाए सरकारी टोल-फ्री नंबर पर कॉल कर 108 एम्बुलेंस को बुलाया। जैसे ही एम्बुलेंस हांफते-हांफते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर पहुंची, वह अचानक बंद हो गई। आनन-फानन में दोनों तड़पते मासूमों को एम्बुलेंस के भीतर स्ट्रेचर पर बैठाया गया। इसके बाद चालक ने चाबी घुमाकर गाड़ी को स्टार्ट करने की कड़क कोशिश की, लेकिन इंजन से सिर्फ घुरघुराहट की आवाज आई और गाड़ी टस से मस नहीं हुई।

परिजनों और ग्रामीणों ने लगाया महा-धक्का; थक-हारकर निजी गाड़ी से भागे लोग

अस्पताल परिसर में मासूमों की उखड़ती सांसों के बीच भयंकर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। मौके पर मौजूद दर्जनों ग्रामीणों और रोते-बिलखते परिजनों ने मानवता दिखाते हुए सरकारी तंत्र की उस ‘बीमार’ एम्बुलेंस को पीछे से कड़ा धक्का लगाना शुरू किया।

सड़क पर दूर तक धक्का मारने के बावजूद कबाड़ हो चुकी एम्बुलेंस चालू नहीं हो सकी। अंततः, सरकारी व्यवस्था से पूरी तरह निराश और थक-हारकर, बच्चों की जान बचाने के लिए परिजनों ने तुरंत बाजार से भारी-भरकम पैसे चुकाकर एक निजी (प्राइवेट) एम्बुलेंस का इंतजाम किया और दोनों मासूमों को गया भिजवाया।

चालक रवींद्र यादव और चिकित्सा पदाधिकारी डॉ० वेद प्रकाश ने सिविल सर्जन को घेरा

न्यूज़ स्केल लाइव की टीम ने जब इस महा-लापरवाही को लेकर मौके पर लाइव पड़ताल की, तो सिस्टम के भीतर का असली कचरा और सच सामने आ गया:

  • चालक रवींद्र यादव का इकबालिया बयान: “यह 108 एम्बुलेंस काफी दिनों से खराब है। इसके इंजन और बैटरी में कड़ा विधिक फॉल्ट है। इसको लेकर मैंने खुद कई बार वरीय अधिकारियों और एजेंसी को लिखित शिकायत भेजी है, बावजूद इसके कोई भी सुध लेने वाला नहीं है। हमें जबरन इस खटारा गाड़ी को चलाने पर मजबूर किया जाता है।”

  • चिकित्सा पदाधिकारी डॉ० वेद प्रकाश का कड़क बयान: “हंटरगंज में तैनात 108 एम्बुलेंस की फिटनेस की व्यवस्था वाकई बेहद लचर और घटिया है। इस गंभीर समस्या को लेकर मैंने खुद कई बार चतरा जिला सिविल सर्जन (CS) डॉ० राजकुमार से फोन पर और बैठकों में सीधी बात की है। लेकिन गंभीर प्रशासनिक उदासीनता का आलम यह है कि सिविल सर्जन महोदय ने एम्बुलेंस की फिटनेस और मेंटेनेंस को लेकर आज तक कोई गंभीरता नहीं दिखाई। जिला मुख्यालय की इसी सुस्ती का खामियाजा आज गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।”

सुलगते सवाल— कबाड़ गाड़ियों के भरोसे चतरा की जनता; आखिर कौन है जिम्मेदार?

इस भयावह वाकये के बाद हंटरगंज के स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध नागरिकों ने चतरा के स्वास्थ्य महकमे पर तीखा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि सरकार ने एम्बुलेंस की व्यवस्था टैक्सपेयर्स के पैसों से आम जनता की आपातकालीन सुविधा के लिए चालू की है, लेकिन चतरा के सिविल सर्जन और स्वास्थ्य विभाग की कड़क लापरवाही के चलते एम्बुलेंस खुद कबाड़ खानों की शोभा बढ़ा रही हैं।

जनता सीधे तौर पर सवाल पूछ रही है कि अगर एम्बुलेंस के स्टार्ट न होने के कारण उन दो मासूमों की जान बीच रास्ते में चली जाती, तो इस हत्यारी व्यवस्था का जिम्मेदार कौन होता? क्या एयरकंडीशंड कमरों में बैठने वाले सिविल सर्जन डॉ० राजकुमार पर गैर-इरादतन हत्या का विधिक मुकदमा दर्ज नहीं होना चाहिए? चतरा के मुस्तैद उपायुक्त रवि आनंद को इस पूरे एम्बुलेंस मेंटेनेंस सिंडिकेट की कड़ाई से विधिक जांच करानी चाहिए।

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