भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में महिलाओं-पुरुषों ने खोल रखा था मोर्चा। कार्यपालक अभियंता के निर्देश पर पहुंचे कनीय अभियंता; 3 से 4 दिनों में अलग फीडर चालू करने का दिया लिखित वादा, पूर्व मुखिया व पत्रकार ने किया नेतृत्व
पत्थलगड़ा (चतरा) | न्यूज स्केल लाइव
चतरा जिले के पत्थलगड़ा प्रखंड अंतर्गत ग्राम नावाडीह-बाजोबार के ग्रामीणों ने अपने विधिक अधिकारों और व्याप्त बिजली महा-कटौती के खिलाफ जो एकजुट होकर कड़क आवाज उठाई थी, आखिरकार वह रंग लाई। चिलचिलाती धूप, लू के थपेड़ों और भीषण गर्मी के बीच अपने हक के लिए अनवरत धरने पर बैठे ग्रामीणों के ऐतिहासिक आंदोलन के आगे बिजली विभाग के आला अधिकारियों को पूरी तरह घुटने टेकने पर मजबूर होना पड़ा।
विभाग द्वारा अगले 3 से 4 दिनों के भीतर नावाडीह-बाजोबार गांव के लिए एक बिल्कुल अलग फीडर (Separate Feeder) चालू कर निर्बाध रूप से बिजली आपूर्ति बहाल करने के आधिकारिक लिखित आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने मंगलवार को अपना आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से स्थगित कर दिया।
आसमान से बरसती आग के बीच डटे रहे आंदोलनकारी; महिलाओं ने भी संभाली कमान
विगत कई हफ्तों से गांव में बिजली की बदहाल और नारकीय व्यवस्था से नाराज ग्रामीणों ने चतरा बिजली प्रशासन के खिलाफ आर-पार का मोर्चा खोल दिया था। इस कड़क आंदोलन की सबसे बड़ी और खूबसूरत बानगी यह रही कि इसमें भारी संख्या में स्थानीय महिलाओं और पुरुषों ने चूल्हा-चौका छोड़कर बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
धरना स्थल पर डटे प्रदर्शनकारियों का दोटूक और साफ कहना था:
“बिजली विभाग ने हमारे गांव को चौबीस घंटे अंधेरे में धकेल दिया है. जब तक विभाग हमारी न्यायसंगत मांगों को पूरा नहीं करता और अलग फीडर से बिजली देने का कोई कड़ा व धरातलीय ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक हम इस चिलचिलाती धूप में भी धरना स्थल से एक इंच भी टस से मस नहीं होंगे.”
ग्रामीणों के इस कड़े आक्रोश, चट्टानी एकता और उग्र होते आंदोलन की लाइव खबर जैसे ही चतरा जिला मुख्यालय स्थित बिजली विभाग के आला अधिकारियों तक पहुंची, पूरे महकमे में हड़कंप और खलबली मच गई।
सहायक अभियंता के निर्देश पर दौड़े कनीय अभियंता तरुण कुमार; देना पड़ा लिखित वादा
मामले के विधिक व सामाजिक प्रभाव को देखते हुए विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता (EE) एवं सहायक अभियंता (AE) के कड़े निर्देश पर विभाग के कनीय अभियंता (JE) तरुण कुमार तुरंत बिना एक पल का वक्त गंवाए दल-बल के साथ धरना स्थल पर पहुंचे। जूनियर इंजीनियर ने आंदोलनकारियों के बीच बैठकर उनकी गंभीर बिजली समस्याओं को बेहद संवेदनशीलता के साथ सुना।
ग्रामीणों के कड़े तेवर और विधिक पक्ष को देखते हुए कनीय अभियंता तरुण कुमार ने अपने हस्ताक्षर से युक्त एक आधिकारिक लिखित आश्वासन पत्र (Written Assurance) ग्रामीणों को सौंपा। इस पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से वादा किया कि अगले 3 से 4 दिनों के भीतर नावाडीह-बाजोबार क्षेत्र के लिए पृथक (अलग) फीडर को तकनीकी रूप से पूरी तरह सक्रिय और चालू कर दिया जाएगा, जिससे गांव को बिना किसी बाधा के कड़क और निर्बाध बिजली मिल सके। अधिकारियों के इस प्रामाणिक और लिखित वादे के बाद विस्थापितों व ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से अपनी इस लड़ाई को पूर्ण रूप से सफल घोषित करते हुए धरने को स्थगित करने का निर्णय लिया।
इन जांबाज जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने दी आंदोलन को कड़क दिशा
नावाडीह-बाजोबार की इस ऐतिहासिक और सफल जन-क्रांति को सही दिशा देने और शांतिपूर्ण ढंग से प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने में क्षेत्र के प्रबुद्ध समाजसेवियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मुख्य भूमिका निभाई।
इस महा-धरने का नेतृत्व मुख्य रूप से: मेघन दांगी (पूर्व मुखिया) दीनबंधू ठाकुर (वरिष्ठ पत्रकार) राजेश दांगी (पूर्व पंचायत समिति सदस्य) रामचंद्र दांगी (समाजसेवी) महावीर प्रसाद, गणेश दांगी, तारकेश्वर राणा, नरेश प्रसाद, घुपाला प्रसाद, भुवनेश्वर प्रसाद, राकेश शर्मा, रंजय दांगी, हरि नारायण मिश्रा, देवव्रत दांगी, कृष्णा दांगी, अनिल दांगी, विश्वजीत दांगी, विष्णु देव दांगी (पत्रकार) इन प्रमुख चेहरों के साथ सैकड़ों की संख्या में नावाडीह-बाजोबार के ग्रामीण और किसान भाई पूरी मुस्तैदी के साथ उपस्थित रहे।






















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