सीडीपीओ के 106, महिला पर्यवेक्षिका के 433 और आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका के 1480 रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया तेज करने का हुक्म। गिरिडीह, देवघर और जामताड़ा में बाल विवाह के खिलाफ चलेगा महा-अभियान; मुख्य सचिव की उपस्थिति में योजनाओं की स्क्रूटनी
राँची | न्यूज स्केल लाइव
झारखंड सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की गति को बढ़ाने, प्रशासनिक सुस्ती को दूर करने और विकास की किरणों को समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री पूरी तरह रेस हो गए हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को झारखंड मंत्रालय (प्रोजेक्ट भवन) में महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की अद्यतन कार्य प्रगति की एक उच्चस्तरीय कड़क समीक्षा बैठक की।
समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने केन्द्रांश (Central Share) और राज्यांश (State Share) बजट का शत-प्रतिशत विधिक व्यय सुनिश्चित करते हुए सभी योजनाओं का सीधा लाभ सीधे जरूरतमंदों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाने का कड़ा निर्देश दिया।
विभाग में नौकरियों की बौछार; रिक्त पदों को मिशन मोड में भरने का आदेश
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने विभाग में मानव बल की कमी को दूर करने के लिए रिक्त पड़े पदों पर बहाली की प्रक्रियाओं में कड़ाई से तेजी लाने का निर्देश दिया। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि विभाग के अंतर्गत वर्तमान में निम्नलिखित पद रिक्त हैं, जिनपर त्वरित विधिक नियुक्ति की जानी है:
सीडीपीओ (CDPO): 106 पद
महिला पर्यवेक्षिका (Lady Supervisor): 433 पद
आंगनबाड़ी सेविका: 583 पद
आंगनबाड़ी सहायिका: 897 पद
मुख्यमंत्री ने दोटूक कहा कि इन सभी पदों पर विधिक नियुक्ति प्रक्रियाओं को अविलंब पूरा किया जाए ताकि धरातल पर योजनाओं की मॉनिटरिंग प्रभावित न हो।
किराए के भवनों से सरकारी स्कूलों में शिफ्ट होंगे आंगनबाड़ी केंद्र; CSR और DMFT फंड का होगा उपयोग
मुख्यमंत्री ने राज्य के बच्चों के स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा के विधिक ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए “मिशन मोड में मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र” विकसित करने का निर्देश दिया।
फंड का उपयोग: कड़क निर्देश दिया गया कि जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का बेहतर उपयोग कर पहले चरण में जीर्ण-शीर्ण (जर्जर) एवं किराए के भवनों में चल रहे केंद्रों को अपने सरकारी भवनों में शिफ्ट कराया जाए।
मूलभूत सुविधाएं: सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में अनिवार्य रूप से बिजली, पानी (पेयजल आपूर्ति) और सुव्यवस्थित शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।
स्कूलों में शिफ्टिंग: अधिकारियों ने बताया कि किराए के केंद्रों को सरकारी विद्यालय परिसरों में शिफ्ट किया जा रहा है, जिससे नौनिहालों को एक बेहतर और सकारात्मक शैक्षणिक माहौल मिल सके।
बाल विवाह मुक्त झारखंड के लिए बनेगा ‘ब्रांड एंबेसडर’; गिरिडीह, देवघर और जामताड़ा राडार पर
सामाजिक कुप्रथाओं पर चोट करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बाल विवाह पर हर हाल में पूर्ण विधिक रोक लगाने की कड़क हिदायत दी। उन्होंने चिन्हित करते हुए कहा कि गिरिडीह, देवघर और जामताड़ा जैसे जिलों में बाल विवाह के मामले ज्यादा सुनने को मिल रहे हैं।
जागरूकता और हंटर: इन जिलों में विशेष अभियान चलाकर लोगों को ऑडियो-वीडियो और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से जागरूक किया जाए और बाल विवाह कराने वाले दलालों व इसमें शामिल लोगों पर होने वाली कड़क कानूनी कार्रवाई (विधिक धाराओं) की जानकारी दी जाए।
बेटियां बनेंगी ब्रांड एंबेसडर: बाल विवाह के खिलाफ साहस दिखाने वाली और इस कुप्रथा को तोड़ने वाली स्थानीय बालिकाओं को जिला प्रशासन ‘ब्रांड एंबेसडर/वॉलेंटियर’ बनाएगा, ताकि वे समाज में अल्पायु विवाह के खिलाफ अलख जगा सकें।
मईयां सम्मान और सर्वजन पेंशन योजना की समीक्षा; छूटे लाभुकों को जोड़ने का निर्देश
बैठक में राज्य की महत्वाकांक्षी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की भी सघन विधिक समीक्षा की गई:
मुख्यमंत्री सर्वजन पेंशन योजना: निर्धारित आयु वर्ग के सभी पात्र व्यक्तियों को शत-प्रतिशत पेंशन योजना से आच्छादित करने का निर्देश दिया गया।
झारखंड मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना: योजना की कार्यप्रगति की जानकारी लेते हुए सीएम ने कहा कि अर्हता (योग्यता) पूर्ण करने वाले जितने भी छूटे हुए लाभुक हैं, उन्हें विशेष कैंप लगाकर तुरंत इस योजना से जोड़ा जाए।
अन्य योजनाएं: इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, राज्य विधवा पुनर्विवाह प्रोत्साहन योजना, दिव्यांग छात्रवृत्ति योजना एवं दिव्यांग जनों को विशेष उपकरण (ट्राईसाइकिल आदि) उपलब्ध कराने की विधिक प्रगति की समीक्षा कर कड़े दिशा-निर्देश दिए।
महिला हेल्पलाइन और सखी वन स्टॉप सेंटर को पुलिस प्रशासन से जोड़ने का हुक्म
डिजिटल सुरक्षा और महिला सुरक्षा को मजबूत करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि “पोषण ट्रैकर पोर्टल” पर आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा मोबाइल के जरिए प्रत्येक दिन की गतिविधियों को कड़ाई से अपलोड कराया जाए। वहीं, हिंसा से पीड़ित महिलाओं की त्वरित सहायता के लिए संचालित ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ और महिला हेल्पलाइन नंबर के प्रति व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा इसे सीधे स्थानीय पुलिस प्रशासन (Local Police) के साथ टैग करने का निर्देश दिया, ताकि पीड़ित महिलाओं को ऑन-स्पॉट विधिक सुरक्षा मिल सके।
इस उच्चस्तरीय महा-समीक्षा बैठक में मुख्य रूप से राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, महिला, बाल विकास विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह, निदेशक (समाज कल्याण) किरण कुमार पासी, अपर सचिव अभय नंदन अम्बष्ट, निदेशक (आईसीपीएस) विजय कुमार सिन्हा सहित कई आला अधिकारी पूरी मुस्तैदी के साथ उपस्थित रहे।























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