उपायुक्त की भू-अर्जन शाखा के निर्देश पर अंचल कार्यालय ने झोंकी ताकत; विस्थापितों में अविश्वास का माहौल, 2019 के सराढू और सेरनदाग फर्जीवाड़े की यादें ताजा; २26 मई को टेकठा में होने वाली बैठक पर टिकी नजरें
टंडवा (चतरा) | न्यूज स्केल लाइव
चतरा जिले के कोयलांचल क्षेत्र टंडवा प्रखंड में उरदा से धनगडा के बीच बिछाई जाने वाली नई रेलवे लाइन के निर्माण को लेकर जमीन अधिग्रहण (भू-अर्जन) की प्रशासनिक कवायद पूरी तरह विवादों के घेरे में आ गई है। परियोजना को रफ्तार देने के लिए उरदा, कबरा, वृंदा, काढमदिरी, सिसई, टेकठा, फुलवरिया और खद्यैया गांव की सैकड़ों एकड़ रैयती व सरकारी जमीन का अनापत्ति प्रस्ताव (NOC) ग्रामसभा के माध्यम से हासिल करने का विभागीय प्रयास तेज है।
लेकिन, पूर्व के बड़े घोटालों और कथित दलाली के कड़वे अनुभवों के कारण इस बार टंडवा की विस्थापित जनता और ग्रामीणों के भीतर प्रशासनिक तंत्र को लेकर भारी अविश्वास, अंसतोष और तीखी नाराजगी साफ झलक रही है। इसी क्रम में सोमवार को सिसई गांव में आयोजित होने वाली प्रस्तावित विशेष ग्रामसभा पूरी तरह से विफल और फ्लॉप साबित हुई है।
चतरा उपायुक्त रवि आनंद के भू-अर्जन शाखा से जारी ज्ञापांक 359 दिनांक 11/05/2026 के कड़े आलोक में टंडवा अंचल कार्यालय ने ज्ञापांक 519 दिनांक 12/05/2026 के माध्यम से गांवों में ग्रामसभा कराकर अनापत्ति लेने की विधिक प्रक्रिया शुरू की है। इस ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत कुल अधिग्रहित होने वाली जमीनों का ब्योरा इस प्रकार है:
कबरा: 106.35 एकड़
उरदा: 65.32 एकड़
काढमदिरी: 29.35 एकड़
सिसई: 9.35 एकड़
वृंदा: 8.03 एकड़
टेकठा: 4.74 एकड़
खद्यैया: 3.25 एकड़
फुलवरिया: 0.80 एकड़
अधिकारियों के न पहुंचने से भड़की पंचायत समिति सदस्य; उरदा में भी फेल हुआ था प्रयास
सोमवार को सिसई गांव में रेलवे लाइन के लिए एनओसी लेने हेतु ग्रामसभा आहूत की गई थी, लेकिन वह पूरी तरह विफल रही। मामले की जानकारी देते हुए स्थानीय पंचायत समिति सदस्य (पंसस) शशिबाला ने कड़े शब्दों में बताया कि ग्रामीण बैठक के लिए पूरी मुस्तैदी से जुटे रहे, लेकिन देर शाम तक अंचल कार्यालय या जिला प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार राजस्व अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। अधिकारियों की इस गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली से ग्रामीणों का अविश्वास और गहरा गया है।
इससे पूर्व, बीते 14 मई को उरदा गांव में भी बगैर समुचित ढोल-नगाड़ा पिटवाए और बगैर उचित प्रचार-प्रसार किए गुपचुप तरीके से अनापत्ति लेने का प्रयास किया गया था, जिसे जागरूक ग्रामीणों ने पुरजोर विरोध जताकर पूरी तरह विफल कर दिया था। इसके बाद कबरा, वृंदा और काढमदिरी गांव में भी ग्रामसभा की विधिक तिथियां बीत चुकी हैं, लेकिन वहां बैठकें हुईं भी हैं या नहीं, इसकी कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं है। पूछने पर काढमदिरी निवासी दिलीप पांडेय ने साफ बताया कि उनके गांव में कोई ग्रामसभा नहीं हुई है। वहीं, ग्रामीण उदय पांडेय ने दोटूक कहा कि इस बैठक को लेकर ग्रामीणों में न तो कोई चर्चा है और न ही कोई दिलचस्पी। बहरहाल, अब 26 मई को टेकठा गांव में होने वाली बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं।
टंडवा में ‘फर्जी ग्रामसभा’ का पुराना खूनी इतिहास; 10 वर्ष पहले मरे लोग भी कर चुके हैं हस्ताक्षर!
टंडवा अंचल और कोयलांचल परियोजनाओं में अनापत्ति प्रस्ताव (NOC) हासिल करने के लिए अंदरखाने में रुपयों और प्रभाव का कैसा-कैसा गंदा खेल होता रहा है, यह चतरा जिले में किसी से छिपा नहीं है। न्यूज़ स्केल लाइव की विशेष इन्वेस्टिगेटिव ब्यूरो रिपोर्ट में पूर्व के दो बड़े मामलों का उजागर होना लाजिमी है:
२2019 का सराढू महा-फर्जीवाड़ा: वर्ष 2019 में मगध कोलियरी से एनटीपीसी (NTPC) तक कन्वेयर कॉरिडोर के निर्माण हेतु सराढू में एक ग्रामसभा आयोजित दिखाई गई थी। बाद में जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने साक्ष्यों के साथ इसे पूरी तरह फर्जी साबित किया। हैरान करने वाली बात यह थी कि ग्रामसभा की विधिक पंजी (रजिस्टर) में उन ग्रामीणों के भी अंगूठे और हस्ताक्षर मौजूद थे, जिनकी मौत 10 वर्ष पूर्व ही हो चुकी थी! इस भूतिया हस्ताक्षर ने सिस्टम की विश्वसनीयता को तार-तार कर दिया था। दिलचस्प स्थिति यह थी कि स्थानीय मुखिया सीता देवी के स्थान पर राहम के मुखिया की अध्यक्षता दर्शा दी गई थी। मामला जाहिर होने पर मुखिया ने अपनी मौजूदगी को खारिज किया, लेकिन भारी पैसों के बल पर मामले का पटाक्षेप कर दिया गया और काम आज भी निर्बाध जारी है।
सेरनदाग आम्रपाली रेलवे लाइन घोटाला: ऐसा ही एक और बहुचर्चित खेल आम्रपाली कोल परियोजना से जुड़े रेलवे लाइन निर्माण को लेकर खेला गया। यहाँ सेरनदाग गांव की फर्जी ग्रामसभा गुपचुप तरीके से तैयार कर, जनप्रतिनिधियों और दर्जनों ग्रामीणों के जाली हस्ताक्षर बनाकर प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जा रहा था। ऐन वक्त पर भनक लगने पर ग्रामीणों ने भारी बवाल काटा। यह मामला आज भी राजभवन से लेकर बड़े-बड़े अधिकारियों के दरबारों में विधिक रूप से विचाराधीन है। बताया जाता है कि इस पूरे खेल में बिचौलियों, दलालों और कतिपय सफेदपोशों के बीच रुपयों का जमकर बंदरबांट हुआ था।
यही कारण है कि जब वर्तमान में उरदा-धनगडा रेलवे लाइन के लिए अंचल प्रशासन दोबारा सक्रिय हुआ है, तो टंडवा की जनता अपने हक और अपनी कीमती जमीनों की रक्षा के लिए पूरी तरह चौकस और मुस्तैद हो गई है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि विकास के नाम पर अब किसी भी कीमत पर जाली दस्तावेजों का खेल टंडवा की धरती पर चलने नहीं दिया जाएगा।






















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