*लोहरदगा में सीएसआर फंड के दुरुपयोग पर उठे सवाल, बैरिकेटिंग पर खर्च को लेकर नाराजगी*
लोहरदगा शहर के चौक-चौराहों पर हाल के दिनों में लगाए गए पुलिस बैरिकेटिंग पर “सीएसआर फंड द्वारा प्रदत्त” लिखे बोर्ड अब चर्चा का विषय बन गए हैं। हिंडालको इंडस्ट्रीज द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी मद से किए गए इस खर्च पर कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
युवा समाजसेवी रामाधार पाठक ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस जिले में आज भी गांवों में पेयजल संकट, स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था की कमजोरी और गरीबों के लिए मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, वहां सीएसआर का पैसा पुलिस बैरिकेटिंग में झोंकना जनता की भावनाओं के साथ मजाक है।
उन्होंने कहा कि सीएसआर फंड उद्योगों को इसलिए नहीं दिया गया है कि वह सरकारी विभागों के सामान्य कामों को स्पॉन्सर करें या सिर्फ अपने नाम का बोर्ड लगाकर प्रचार करें। यदि कंपनियां सामाजिक जिम्मेदारी के नाम पर केवल लोहे की बैरिकेटिंग लगवाकर अपनी जवाबदेही पूरी मान लें, तो फिर गांवों में प्यासे लोग, जर्जर स्कूल और इलाज के अभाव में परेशान गरीब आखिर किससे उम्मीद करें?
रामाधार पाठक ने सवाल उठाया कि क्या जिले में विकास की सारी समस्याएं खत्म हो चुकी हैं, जो सीएसआर राशि अब बैरिकेटिंग पर खर्च की जा रही है? उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में “कमीशनखोरी और दिखावटी विकास” की बू आ रही है।
उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि सीएसआर फंड के प्रत्येक खर्च की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यह सार्वजनिक किया जाए कि आखिर किस आधार पर बैरिकेटिंग को सामाजिक विकास की श्रेणी में रखा गया। साथ ही उन्होंने कहा कि उद्योगों को सीएसआर राशि अस्पताल, पुस्तकालय, छात्रवृत्ति, पेयजल, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण रोजगार जैसे स्थायी जनहित कार्यों में खर्च करनी चाहिए, ताकि आम जनता को वास्तविक लाभ मिल सके।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सीएसआर फंड का इसी प्रकार “दिखावटी और गैर-जरूरी” कार्यों में दुरुपयोग होता रहा, तो जनता के बीच उद्योगों की सामाजिक छवि पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।























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