अवैध अतिक्रमण रोकने के लिए ‘एसटीएफ राजस्व (STF-R)’ के गठन की उठी पुरजोर मांग। फर्जी अभिलेखों से कॉलोनियां काटने वालों को ‘राज्य अपराधी’ घोषित करने का प्रस्ताव, भूमि अतिक्रमण विरोधी मोर्चा के सैकड़ों कार्यकर्ता रहे मुस्तैद
मुहम्मदाबाद/गाजीपुर | न्यूज स्केल लाइव
उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीनों पर दलालों और भू-माफियाओं द्वारा किए जा रहे अवैध कब्जों और सरकारी संपत्तियों की लूट के खिलाफ गाजीपुर जिले की मोहम्मदाबाद तहसील में एक बहुत बड़ा और कड़क शंखनाद हुआ है। तहसील मोहम्मदाबाद के अंतर्गत सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने और भू-माफियाओं के सिंडिकेट को पूरी तरह ध्वस्त करने की मांग को लेकर सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक बेहद विस्तृत और कड़क ज्ञापन उप जिलाधिकारी (SDM) डॉक्टर हर्षिता तिवारी के माध्यम से सौंपा गया।
इस ज्ञापन में प्रदेश भर में सरकारी और सार्वजनिक भूमि पर हो रहे अवैध कब्जों को एक गंभीर सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक संकट बताते हुए शासन स्तर से तत्काल प्रभाव से बुल्डोजर और विधिक दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।
राजनीतिक संरक्षण में लूटी गई नजूल, सीलिंग और शत्रु संपत्ति; जनसांख्यिकी बदलने का आरोप
सौपे गए आधिकारिक ज्ञापन में पूर्ववर्ती सरकारों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए सीधे तौर पर राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत का सनसनीखेज आरोप मढ़ा गया है। ज्ञापन के अनुसार:
सरकारी भूमि की लूट: पूर्व की व्यवस्थाओं में कतिपय रसूखदारों ने नगरीय क्षेत्रों से बिल्कुल सटी कीमती नजूल भूमि, निष्क्रांत सीलिंग, शत्रु संपत्ति, वक्फ, भूदान तथा अन्य महत्वपूर्ण सरकारी जमीनों पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे किए।
फर्जीवाड़े का खेल: माफियाओं ने फर्जी आवंटन, फर्जी विनिमय (एक्सचेंज), फर्जी अभिलेख (दस्तावेज) और कागजी आवासीय समितियों का मकड़जाल बनाकर सरकारी जमीनों पर जबरन कॉलोनियां काट दीं और अवैध प्लॉटिंग कर डाली।
जनसांख्यिकी संकट: इस सुनियोजित भूमि घोटाले और अतिक्रमण के कारण राज्य के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों की जनसांख्यिकीय स्थिति (Demography) पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है।
“एसटीएफ राजस्व (STF-R)” और फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की उठी कड़क मांग
भूमि अतिक्रमण विरोधी मोर्चा ने भू-माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों के नापाक गठजोड़ (नेक्सस) को जड़ से उखाड़ने के लिए मुख्यमंत्री के सामने कई कड़े और विधिक प्रस्ताव रखे हैं:
विशेष बल का गठन: अधिकारियों, कर्मचारियों और भू-माफियाओं के सिंडिकेट पर त्वरित प्रहार के लिए राज्य स्तर पर “एसटीएफ राजस्व (STF-R)” यानी विशेष सतर्कता राजस्व बल का गठन किया जाए।
फास्ट ट्रैक राजस्व कोर्ट: जिला स्तर पर फास्ट ट्रैक राजस्व न्यायालयों की स्थापना हो, ताकि सालों से लटके भूमि अतिक्रमण के मुकदमों का शीघ्र निस्तारण (जल्द फैसला) किया जा सके।
विशेष अध्यादेश: भूमि अतिक्रमण को सामान्य श्रेणी से हटाकर “विशेष अपराध” घोषित किया जाए और एक कड़क अध्यादेश लाकर फर्जी कागजात बनाने वालों को सीधे “राज्य अपराधी” घोषित किया जाए।
- भू-माफिया नियंत्रण सेल: सभी तहसीलों में एक विशेष टास्क फोर्स के रूप में “भू-माफिया नियंत्रण सेल” और संयुक्त राजस्व सर्वे टीम का गठन अनिवार्य हो।
1359 फसली और चकबंदी अभिलेखों से होगा डिजिटल सर्वे; जवाबदेही तय
ज्ञापन के जरिए सरकारी संपत्तियों को सुरक्षित करने के लिए आधुनिक और वैज्ञानिक विधा अपनाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत सभी सरकारी जमीनों का डिजिटल सर्वे कराने, 1359 फसली और पुराने चकबंदी अभिलेखों (मूल रिकॉर्ड) के आधार पर जमीनों का भौतिक (जमीनी) सत्यापन कराने तथा सभी संपत्तियों का पारदर्शी ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार करने की मांग की गई है।
साथ ही, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए लेखपालों, कानूनगो और नगर निकाय कर्मचारियों के लिए एक कड़क ट्रांसफर नीति (स्थानांतरण नीति) लागू करने की वकालत की गई है, ताकि लंबे समय से एक ही सीट पर जमे कर्मचारियों के संपत्ति की जांच कराई जा सके। मोर्चा ने साफ कहा है कि राजस्व अधिकारियों, ग्राम प्रधानों और नगर पंचायत अध्यक्षों की सरकारी जमीनों के संरक्षण को लेकर सीधे विधिक जवाबदेही तय की जाए और मिलीभगत पाए जाने पर उन्हें सीधे जेल भेजा जाए।
मुख्यमंत्री को संबोधित इस महा-ज्ञापन को सौंपने के दौरान क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिक और प्रखर सामाजिक कार्यकर्ता मुख्य रूप से मुस्तैद रहे। इनमें: मीरा राय (समाजसेवी) सतीन्द्र तिवारी, नारायण सनातनी, अमित अग्रवाल, अमित कमलापुरी, ओमप्रकाश, विनोद, दया, राजेन्द्र, सन्तोष, संजय, प्रभात, प्रदीप सिंह, अश्वनी राय, मनीष, आयुष, सोनू और प्रमोद इन प्रमुख चेहरों के साथ ‘भूमि अतिक्रमण विरोधी मोर्चा’ से जुड़े सैकड़ों जांबाज कार्यकर्ताओं ने तहसील परिसर में अपनी कड़क उपस्थिति दर्ज कराई और दोटूक कहा कि यदि प्रदेश सरकार ने इस भू-माफिया दमन अभियान को व्यापक स्तर पर शुरू नहीं किया, तो समस्त जनता सड़कों पर उतरकर उग्र विधिक आंदोलन के लिए पूरी तरह बाध्य होगी।





















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