मरा समझकर परिजनों ने कर दिया था अंतिम संस्कार; बेटी के घर सकुशल पहुंचे तो उड़े सबके होश, असली मृतक की पहचान के लिए अब होगा डीएनए टेस्ट
झारखंड के खूंटी जिले से एक ऐसी हैरान और अवाक कर देने वाली सनसनीखेज दास्तान सामने आई है, जिसे सुनकर हर कोई दंग है। यहाँ एक परिवार ने जिस व्यक्ति को मृत मानकर जनजातीय रीति-रिवाज के साथ सम्मानपूर्वक दफना दिया था, वह अंतिम संस्कार के कुछ दिनों बाद अचानक जिंदा वापस लौट आया।
खूंटी थाना क्षेत्र के पत्राटोली गांव के रहने वाले विश्राम मुंडा बीते 10 मई से लापता थे, जिसके बाद पुलिस द्वारा बरामद किए गए एक अज्ञात शव की बनावट और कद-काठी के आधार पर परिजनों ने उसे विश्राम मुंडा मान लिया था। लेकिन जब ‘मृत’ घोषित विश्राम अचानक अपनी बेटी के घर पहुंचे, तो पूरे इलाके में हड़कंप और कौतूहल मच गया। अब पुलिस असली मृतक की शिनाख्त के लिए दफनाए गए शव को कब्र से बाहर निकालकर उसका डीएनए (DNA) टेस्ट कराने की तैयारियों में जुट गई है।
शादी समारोह से हुए थे लापता; नाले में मिला था हमशक्ल का शव
पूरी घटना के अनुसार, पत्राटोली गांव के रहने वाले 45 वर्षीय विश्राम मुंडा बीते 10 मई 2026 को एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए अपने घर से निकले थे। इसके बाद जब वे कई दिनों तक वापस नहीं लौटे, तो चिंतित परिजनों ने रिश्तेदारों और संभावित ठिकानों पर उनकी काफी खोजबीन की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। इसी दौरान, लापता होने के अगले ही दिन स्थानीय पुलिस को एक नाले से एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद हुआ, जिसकी सूचना पुलिस द्वारा परिजनों को दी गई।
कद-काठी देखकर खा गए धोखा; सम्मान के साथ दफनाया गया शव
शव मिलने की जानकारी के बाद बदहवास परिजन खूंटी सदर अस्पताल के मर्चुरी (शव गृह) पहुंचे। चूंकि नाले में रहने के कारण शव का चेहरा काफी हद तक विकृत और खराब हो चुका था, इसलिए परिजनों और ग्रामीणों ने शव की लंबाई, शारीरिक बनावट और कद-काठी की अत्यधिक समानता को देखकर यह मान लिया कि यह विश्राम मुंडा ही हैं।
पुलिस ने भी परिजनों के दावों और शिनाख्त के आधार पर जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शव को उन्हें सौंप दिया। इसके बाद गांव लाकर जनजातीय रीति-रिवाजों के अनुसार पूरे विधि-विधान से शव को दफना कर उनका अंतिम संस्कार संपन्न कर दिया गया। परिवार में मातम पसरा हुआ था और श्राद्ध कर्म की तैयारी चल रही थी।
बेटी के दरवाजे पर साक्षात खड़े हो गए पिता; रामगढ़ चले गए थे विश्राम
इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा और आंखें फटी की फटी रख देने वाला ट्विस्ट तब आया, जब अंतिम संस्कार के कुछ दिनों बाद विश्राम मुंडा अचानक खूंटी स्थित अपनी बेटी के किराए के मकान पर सकुशल पहुंच गए। अपने पिता को, जिन्हें वे अपने हाथों से दफना चुके थे, साक्षात सामने जीवित खड़ा देख बेटी और परिवार के अन्य सदस्यों के पैरों तले जमीन खिसक गई। घर में चीख-पुकार और डर का माहौल बन गया।
जब स्थिति सामान्य हुई और विश्राम मुंडा से पूछताछ की गई, तो उन्होंने बताया कि वह किसी को बिना बताए खूंटी से करीब 70 किलोमीटर दूर रामगढ़ जिले में चले गए थे और वहां बिल्कुल सुरक्षित रहकर मजदूरी/काम कर रहे थे।
कब्र से निकाला जाएगा अज्ञात शव; पुलिस के सामने बड़ी चुनौती
विश्राम मुंडा के जिंदा लौटने की खबर जैसे ही आग की तरह इलाके में फैली, पत्राटोली गांव में इस ‘चमत्कार’ को देखने और विश्राम से मिलने के लिए हजारों लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस बेहद संवेदनशील और पेचीदा मामले के बाद खूंटी पुलिस भी तुरंत एक्टिव मोड में आ गई है।
अब पुलिस प्रशासन के सामने सबसे बड़ी मिस्ट्री और चुनौती यह पता लगाना है कि जिस अज्ञात व्यक्ति के शव को विश्राम मुंडा समझकर दफनाया गया था, वह आखिर कौन था? उसकी हत्या हुई थी या मौत प्राकृतिक थी?
अधिकारियों के मुताबिक, अब कानूनी प्रक्रिया के तहत जिला दंडाधिकारी (मजिस्ट्रेट) की लिखित अनुमति और मौजूदगी में दफनाए गए अज्ञात शव को कब्र से बाहर निकाला जाएगा। इसके बाद असली मृतक की वास्तविक शिनाख्त के लिए उसका डीएनए (DNA) टेस्ट कराया जाएगा, ताकि उसके असली माता-पिता या परिजनों का पता लगाकर उन्हें सूचित किया जा सके। इस अचरज भरे मामले ने पूरे जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।





















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