झारखंड आंदोलनकारी दशमी कुमारी को प्रधानमंत्री आवास योजना दिलाने के लिए अनील कुमार समाजिक कार्यकर्ता ने नगर परिषद पदाधिकारी को सौंपा आवेदन – मनीष कुमार ने कहा ऐसे गरीबों को मिलेगा सीधा लाभ
गुमला – झारखंड आंदोलनकारी दशमी कुमारी को प्रधानमंत्री आवास योजना दिलाने के लिए कदम उठाते हुए नगर परिषद कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार को आवेदन देकर वर्षों से झुग्गी-झोपड़ी में जीवनयापन कर रही महिला झारखंड आंदोलनकारी दशमी कुमारी को प्रधानमंत्री आवास योजना का सीधा लाभ देने की मांग रखी इस बिंदु पर नगर परिषद कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार ने प्रधानमंत्री आवास योजना का आवेदन पत्र लेते हुए तत्काल इस आवेदन को संज्ञान में लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना दिलाने के लिए और भी ऐसे वंचित रह गए लाभूको को लेकर आएं उन्होंने कहा कि बस उनकी अपनी जमीन हो चाहे खरीदीं हुई या माता-पिता के नाम पर अपनी भूमि पर रह रहे हो उन्होंने समाजिक कार्यकर्ता अनिल कुमार पान वाला को आशान्वित करते हुए कहा कि गरीबों को ढूंढ कर लाएं उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने में मदद मिलेगी।
यहां बताते चलें कि झारखण्ड आंदोलनकारी दशमी कुमारी आंदोलन शुरू कर झारखंड को अलग राज्य दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली दशमी कुमारी एक टूटे-फूटे हुए झोपड़ी में रहने को मजबूर है।
नगर परिषद गुमला के पदाधिकारी को प्रधानमंत्री आवास योजना का आवेदन देने के पूर्व समाजिक कार्यकर्ता अनिल कुमार पान वाला ने शुक्रवार को लाचार और अत्यंत गरीब झारखंड आंदोलनकारी दशमी कुमारी के आवास पर पहुंचे और आवेदन पत्र लेते हुए कहा कि ऐसे लोगों को पहले ही आवास योजना का लाभ देने थे लेकिन वार्ड पार्षद द्वारा कमीशन को लेकर गरीबों को वंचित कर रहे थे।
दशमी कुमारी ने कहा कि इस बार लगता है मैं भी पक्के मकान में रहने लगूंगी
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मिर्गी बीमारी ठीक हो जाती तो नौवीं के आगे भी पढ़ाई-लिखाई करती लेकिन पिता के रहते अनाथ की तरह हूं – कंचन कुमारी तिर्की
इस मौके पर दशमी कुमारी के भाई की बेटी कंचन कुमारी तिर्की भी मौजूद थीं उसकी आपबीती बताई कि वह पड़ना चाहती थी लेकिन मिर्गी की बीमारी से पीड़ित रोगी होने के कारण स्कूल में अनेक बार गिर गई परिणामस्वरूप उसे हॉस्टल से छुट्टी दे दी गई और साथ ही उसने कहा कि मेरी मां की मृत्यु हो जाने के साथ ही उसके पिता जो फौजी भी थे उन्होंने भी हमें अकेला छोड़ दिया है पिता रिटायर हो है पेंशन उठा रहे हैं लेकिन बेटी को एक भी पैसा नही देते हैं और वे एक गांव में अलग रहते हैं उसने कहा कि बीमारी ठीक हो जाती तो कम-से-कम मैट्रिक परीक्षा देती पर मेरे कहने के बाद भी कि मैट्रिक पास कर लेने दिजिए स्कूल हॉस्टल से छुट्टी दे दी गई। कंचन कुमारी तिर्की ने प्रशासन से इलाज और मदद की मांग रखी है।