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महंगाई का बड़ा झटका: देश भर में पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा, रांची और पटना में भी बढ़ीं कीमतें

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पीएम मोदी की अपील और वैश्विक संकट के बीच तेल कंपनियों का फैसला; दिल्ली में ₹97.77 तो पटना में ₹108 के पार पहुंचा पेट्रोल

शुक्रवार सुबह देशवासियों के लिए महंगाई की एक बुरी खबर लेकर आई। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में ₹3 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी कर दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है और हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कच्चे तेल की खपत कम करने की अपील की थी। स्थानीय टैक्स और वैट (VAT) के कारण अलग-अलग राज्यों में बढ़ोतरी का आंकड़ा थोड़ा भिन्न है।

प्रमुख शहरों में नए और पुराने रेट (₹/लीटर)

शहरपेट्रोल (पुराना)पेट्रोल (नया)डीजल (पुराना)डीजल (नया)
दिल्ली94.7797.7787.6790.67
मुंबई103.54106.6890.0393.14
कोलकाता105.45108.7492.0295.13
चेन्नई100.80103.6792.3995.25
जयपुर105.03108.1990.4993.43

रांची और पटना में कीमतों का हाल

झारखंड और बिहार के उपभोक्ताओं पर भी इस बढ़ोतरी का सीधा असर पड़ा है। यहाँ के नए दाम इस प्रकार हैं:

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें? मुख्य कारण:

1. तेल कंपनियों का भारी घाटा: सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) को महंगे क्रूड ऑयल के कारण रोजाना 1000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, यदि कीमतें नहीं बढ़ाई जातीं, तो एक तिमाही में घाटा 1 लाख करोड़ रुपये के पार जा सकता था।

2. कच्चे तेल का $100 के पार होना: पिछले तीन महीनों से भारतीय बास्केट में कच्चे तेल की औसत कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। अप्रैल 2026 में यह औसत 114 डॉलर तक पहुंच गया था, जिससे आयात लागत काफी बढ़ गई है।

3. डॉलर के मुकाबले रुपये का गिरना: विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया कमजोर होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹95 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया है। इससे विदेशों से तेल खरीदना और भी महंगा हो गया है।

प्रधानमंत्री की देशवासियों से अपील

संकट की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए देशवासियों से ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील की है। उन्होंने नागरिकों से सोने की खरीद को कम करने और विदेश यात्राओं को फिलहाल स्थगित करने जैसे उपाय अपनाने का आग्रह किया है, ताकि अर्थव्यवस्था पर बोझ कम किया जा सके।

मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के कारण सप्लाई चैन बाधित है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी अस्थिरता को देखते हुए आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

 

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