कंप्यूटर ऑपरेटरों और अधिकारियों की मिलीभगत से ₹72 करोड़ के गबन का अनुमान; शकील अहमद ने पीएम को पत्र लिख की उच्च स्तरीय जांच की मांग
चतरा | न्यूज स्केल लाइव
चतरा जिले में ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि पोर्टल’ में हुई बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और फर्जीवाड़े का मामला अब देश के सर्वोच्च कार्यालय यानी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की दहलीज तक पहुंच गया है। जिले के सिमरिया कला निवासी शकील अहमद ने माननीय प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस पूरे घोटाले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता के अनुसार, सितंबर 2025 में मीडिया के माध्यम से यह खुलासा हुआ था कि चतरा जिले के विभिन्न अंचल कार्यालयों में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों ने उच्च अधिकारियों के साथ मिलकर 11,000 अपात्र और फर्जी किसानों की प्रविष्टि पोर्टल पर कर दी। नियमों को ताक पर रखकर बिना दस्तावेज अपलोड किए ही नाम दर्ज किए गए और बाद में साक्ष्य मिटाने के लिए दस्तावेजों को पोर्टल से हटा दिया गया।
₹72 करोड़ के नुकसान का अनुमान शकील अहमद ने अपने पत्र में गणितीय अनुमान लगाते हुए बताया कि यदि 12,000 फर्जी किसानों को तीन किस्तों में ₹2000-2000 प्राप्त हुए हैं, तो यह आंकड़ा केवल एक किस्त में ₹24 करोड़ और तीन किस्तों में लगभग ₹72 करोड़ तक पहुंचता है। वास्तव में यह गबन इस अनुमान से कहीं बड़ा हो सकता है। जांच समिति की रिपोर्ट पर अब तक कार्रवाई नहीं घोटाला उजागर होने पर तत्कालीन उपायुक्त रमेश घोलप ने तत्कालीन उप विकास आयुक्त (DDC) अमरेंद्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई थी। रिपोर्ट के अनुसार, जांच प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और इसमें एसी कार्यालय (चतरा), लावालौंग, पथलगड़ा, सिमरिया, चतरा और कुंदा अंचल कार्यालय के छह कंप्यूटर ऑपरेटरों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। PMO से लगाई न्याय की गुहार शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस गंभीर मामले की शिकायत उपायुक्त चतरा से किए जाने के 5 माह बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अतः अब प्रधानमंत्री से अनुरोध किया गया है कि इस भ्रष्टाचार में संलिप्त कंप्यूटर ऑपरेटरों, कर्मचारियों और उच्च अधिकारियों पर उचित विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।






















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