CERT-In ने क्वालकॉम स्नैपड्रैगन (Qualcomm Snapdragon) चिपसेट में खोजी गंभीर खामी; बैंक डिटेल्स से लेकर फोटो तक हो सकते हैं चोरी, हैकर्स कर सकते हैं फोन का पूरा कंट्रोल
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अगर आप एंड्रॉयड (Android) स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। भारत सरकार की साइबर सिक्योरिटी एजेंसी सीईआरटी-इन (CERT-In) ने करोड़ों एंड्रॉयड स्मार्टफोन यूजर्स के लिए एक बहुत बड़ी और गंभीर चेतावनी जारी की है। एजेंसी की जांच में स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाले ‘क्वालकॉम स्नैपड्रैगन’ (Qualcomm Snapdragon) चिपसेट में कई खतरनाक खामियां पाई गई हैं। इन खामियों का फायदा उठाकर साइबर अपराधी दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर आपके फोन तक पहुंच बना सकते हैं। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि यह खतरा सिर्फ महंगे (Flagship) स्मार्टफोन्स तक सीमित नहीं है, बल्कि आपके बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन्स भी पूरी तरह से हैकर्स के निशाने पर हैं।
कौन-कौन से प्रोसेसर हैं प्रभावित? सीईआरटी-इन की विस्तृत एडवाइजरी के अनुसार, स्नैपड्रैगन के कई लोकप्रिय प्रोसेसर इस गंभीर खतरे की जद में पाए गए हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
स्नैपड्रैगन 8 जेन सीरीज (Snapdragon 8 Gen Series)
स्नैपड्रैगन 7 सीरीज (Snapdragon 7 Series)
स्नैपड्रैगन 6 सीरीज (Snapdragon 6 Series)
स्नैपड्रैगन 4 जेन सीरीज (Snapdragon 4 Gen Series)
स्नैपड्रैगन 888
क्या है खतरा? आपका क्या-क्या हो सकता है चोरी? यह सिक्योरिटी अलर्ट केवल फोन के स्लो होने या किसी ऐप के क्रैश होने तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, हैकर्स इन तकनीकी कमजोरियों (जैसे मेमोरी करप्शन और बफर ओवरफ्लो) का फायदा उठाकर आपके फोन में रिमोट कोड एग्जीक्यूशन कर सकते हैं। आसान शब्दों में समझें तो हैकर्स आपके फोन के सिस्टम में घुसकर आपकी बैंकिंग डिटेल्स, पासवर्ड्स, निजी फोटो, वीडियो, जरूरी डॉक्यूमेंट्स और दूसरी संवेदनशील जानकारियों को पल भर में चुरा सकते हैं। कुछ मामलों में तो आपके डिवाइस का पूरा कंट्रोल हैकर्स के हाथ में जा सकता है।
सिर्फ फोन नहीं, ये डिवाइस भी हैं रिस्क में सरकारी एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि यह साइबर खतरा केवल स्मार्टफोन तक ही सीमित नहीं है। जिन भी डिवाइस में क्वालकॉम चिपसेट का इस्तेमाल हो रहा है, वे सभी निशाने पर हैं। इनमें टैबलेट्स, वायरलेस डिवाइस, नेटवर्किंग प्रोडक्ट्स, ऑटोमोटिव सिस्टम (स्मार्ट कार सिस्टम) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) डिवाइस भी शामिल हैं। पुराने डिवाइस ज्यादा जोखिम में हैं क्योंकि कई मोबाइल कंपनियां उनके लिए समय पर सिक्योरिटी अपडेट जारी नहीं करती हैं।
बचाव के लिए तुरंत करें ये काम (Safety Tips): सरकारी एजेंसी और साइबर विशेषज्ञों ने सभी यूजर्स को इस खतरे से बचने के लिए तुरंत ये कदम उठाने की सलाह दी है:
सॉफ्टवेयर अपडेट: अपने फोन की ‘Settings’ में जाएं और तुरंत लेटेस्ट सिक्योरिटी अपडेट या सॉफ्टवेयर पैच इंस्टॉल करें।
थर्ड पार्टी ऐप्स से बचें: किसी भी अनजान वेबसाइट या थर्ड पार्टी लिंक से ऐप्स बिल्कुल डाउनलोड न करें।
फोन के व्यवहार पर रखें नजर: अगर आपका फोन अचानक स्लो हो रहा है, ऐप्स खुद-ब-खुद बंद (Crash) हो रहे हैं या फोन की बैटरी बिना इस्तेमाल के बहुत तेजी से खत्म हो रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह हैकिंग का संकेत हो सकता है।






















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