समग्र ब्राह्मण परिषद् का महामाया मंदिर में शानदार आयोजन, पीले वस्त्रों में सजे बटुकों ने दी ‘भवति भिक्षां देहि’ की सदा, वैदिक मंत्रों से गूंजा परिसर
रायपुर, News Scale Live: सनातन धर्म की महान परंपराओं और संस्कारों को सहेजने की दिशा में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रविवार (3 मई) को एक बेहद विहंगम और आध्यात्मिक नजारा देखने को मिला। विप्र सामाजिक संगठन ‘समग्र ब्राह्मण परिषद् छत्तीसगढ़’ की ओर से श्री महामाया देवी मंदिर के सत्संग भवन में प्रदेश स्तरीय “सामूहिक उपनयन संस्कार” का भव्य आयोजन किया गया। इस पुनीत अवसर पर 71 ब्राह्मण बटुकों (बालकों) को पूरे वैदिक विधि-विधान और शास्त्रोचित तरीके से जनेऊ धारण करवाया गया।
वैदिक मंत्रोच्चार से शुरू हुआ अनुष्ठान संगठन के मुख्य सलाहकार और कार्यक्रम संयोजक डॉ. भावेश शुक्ला “पराशर” ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और मंगलाचरण से हुई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। परंपरा के अनुसार चुलमाटी, मंडपाच्छादन, देवतला, चिकट और मातृका पूजन जैसी विधियां संपन्न कराई गईं। इसके बाद बटुकों का मुंडन और स्नान कराकर देव पूजन, मातृ-पितृ वंदन और आचार्य वरण जैसे अनुष्ठान हुए। मुख्य रूप से सभी बटुकों को ‘गायत्री मंत्र’ की दीक्षा दी गई और उन्हें संध्या-वंदन, अनुशासन और ब्रह्मचर्य का महत्व समझाया गया।
पीले वस्त्रों में सजे बटुक, भिक्षाटन कर निकाली बारात यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण करने के बाद सभी बटुकों ने प्राचीन गुरुकुल परंपरा को जीवंत करते हुए “भवति भिक्षां देहि” कहकर भिक्षा मांगने की रस्म निभाई। इसके बाद सभी 71 बटुकों को पीले रंग के कुर्ते-पायजामे में दूल्हे की तरह सजाया गया और गाजे-बाजे व आतिशबाजी के साथ सत्संग भवन से पूरे नगर में उनकी भव्य बारात (शोभायात्रा) निकाली गई, जिसका जगह-जगह स्वागत हुआ। ‘द्विज’ बनकर नया जीवन शुरू करते हैं बालक संगठन के प्रदेश सचिव पं. सजल तिवारी और पं. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि 16 संस्कारों में उपनयन का विशेष महत्व है। जनेऊ धारण करते ही बालक ‘द्विज’ (दूसरा जन्म) कहलाता है, जो उसे ज्ञान और कर्तव्यों की ओर प्रेरित करता है। समग्र ब्राह्मण परिषद् के प्रदेशाध्यक्ष पं. रामानुज तिवारी और मीडिया प्रभारी पं. उमाकांत तिवारी ने बताया कि यह सामूहिक उपनयन संस्कार का लगातार पांचवां वर्ष है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में एकता बढ़ाना और उन परिवारों की मदद करना है, जो अकेले इस बड़े खर्च को नहीं उठा पाते।
आचार्यों और समाजसेवियों का रहा बड़ा योगदान इस वृहद कर्मकांड को आचार्य सुनील कृष्ण शर्मा के मार्गदर्शन में पंडित अश्वनी शुक्ला, पंडित किशोर शुक्ला, पंडित खुशाल तिवारी समेत विद्वान पंडितों की टोली ने संपन्न कराया। कार्यक्रम को सफल बनाने में महामाया देवी मंदिर सार्वजनिक न्यास के पदाधिकारियों और समाज के अनेक गणमान्य लोगों का विशेष सहयोग रहा। वहां मौजूद अभिभावकों ने भी बच्चों में संस्कार सिंचन के इस शानदार प्रयास के लिए परिषद् की जमकर तारीफ की।






















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