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बिहार में ‘सम्राट’ युग का आगाज़: मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर सम्राट चौधरी ने रचा इतिहास; नीतीश के बाद संभाली कमान

On: April 15, 2026 3:29 PM
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न्यूज स्केल डेस्क: बिहार की राजनीति में 15 अप्रैल 2026 की तारीख स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई है। लगभग दो दशकों के बाद बिहार को नया नेतृत्व मिला है। भाजपा के कद्दावर नेता सम्राट चौधरी ने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल सैयद अताउल हसनैन ने लोकभवन के प्रांगण में उन्हें शपथ दिलाई।

सत्ता का बड़ा ‘पॉवर ट्रांसफर’

नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार में हुए इस बड़े सत्ता परिवर्तन के गवाह बनने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत एनडीए के तमाम दिग्गज नेता मौजूद रहे। सम्राट चौधरी भाजपा के पहले ऐसे नेता हैं जो पूर्ण रूप से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन हुए हैं। उनके साथ दो दिग्गजों ने डिप्टी सीएम के रूप में शपथ ली:

  1. बिजेंद्र यादव (जेडीयू)

  2. विजय चौधरी (जेडीयू)

तारापुर के लखनपुर से ‘सत्ता के शिखर’ तक का सफर

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (राकेश कुमार) का जन्म 16 नवंबर 1968 को मुंगेर जिले के तारापुर स्थित लखनपुर गांव में हुआ था। वह एक मजबूत राजनीतिक विरासत के उत्तराधिकारी हैं:

  • पिता: शकुनी चौधरी (7 बार विधायक और पूर्व सांसद)।

  • माता: पार्वती देवी (पूर्व विधायक)।

  • समुदाय: पिछड़ा वर्ग (कुर्मी) समुदाय से आने वाले सम्राट चौधरी की ओबीसी वोट बैंक पर गहरी पकड़ मानी जाती है।

राजनीतिक सफर: युवा मंत्री से सूबे के मुखिया तक

सम्राट चौधरी का राजनीतिक ग्राफ बेहद प्रभावशाली रहा है:

  • शुरुआत: 1990 में आरजेडी (RJD) से करियर शुरू किया और 1999 में राबड़ी देवी सरकार में सबसे कम उम्र के कृषि मंत्री बने।

  • विधायक: वर्ष 2000 और 2010 में परबत्ता विधानसभा से विधायक चुने गए।

  • भाजपा में प्रवेश: 2017 में भाजपा का दामन थामा और महज 8-9 वर्षों में शीर्ष तक पहुंचे।

  • संगठन और सरकार: 2023 में प्रदेश अध्यक्ष बने, जनवरी 2024 में डिप्टी सीएम के रूप में वित्त और स्वास्थ्य जैसे भारी-भरकम विभाग संभाले और 2025 में तारापुर से बड़ी जीत दर्ज की।

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ओबीसी आउटरीच और भाजपा का भरोसा

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाना भाजपा की सोची-समझी ओबीसी आउटरीच रणनीति का हिस्सा है। लोकभवन में शपथ ग्रहण के दौरान समर्थकों का उत्साह देखते ही बन रहा था। अब बिहार की जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ‘सम्राट राज’ में प्रदेश विकास की किन नई ऊंचाइयों को छूता है।

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