शिशु मंदिर में भव्य आयोजन, छात्रों को बताया गया—“शिक्षा ही बदलाव की असली ताकत”
लोहरदगा (झारखंड)। लोहरदगा जिले के सुंदरी देवी सरस्वती शिशु मंदिर में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और गरिमा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में छात्रों को बाबा साहेब के जीवन संघर्ष, उनके विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान से अवगत कराया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि कृपा सिंह (वनवासी कल्याण आश्रम) द्वारा दीप प्रज्वलन एवं माता सरस्वती की वंदना के साथ किया गया। इसके बाद विद्यालय के आचार्य अशोक सिंह, महेंद्र मिश्रा एवं प्रधानाचार्य सुरेश चंद्र पांडे ने अपने संबोधन में डॉ. अंबेडकर के जीवन चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने बाबा साहेब के प्रसिद्ध सूत्र वाक्य—“शिक्षा शेरनी का वह दूध है, जो इसे पियेगा वह निश्चित रूप से दहाड़ेगा”—को दोहराते हुए विद्यार्थियों को शिक्षा के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह सशक्त माध्यम है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
सरस्वती विद्या मंदिर में अंबेडकर जयंती पर ज्ञान और संस्कार का संगम
मुख्य अतिथि कृपा सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि डॉ. अंबेडकर बचपन से ही असाधारण प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर न केवल उच्च शिक्षा प्राप्त की, बल्कि भारतीय संविधान की रचना कर देश को नई दिशा दी। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे बाबा साहेब के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के प्रधानाचार्य, सभी आचार्य बंधु, भगिनी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। समापन के अवसर पर सभी ने सामूहिक रूप से डॉ. अंबेडकर के बताए मार्ग पर चलने और राष्ट्र हित में योगदान देने का संकल्प लिया।

















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