काम ठप, मजदूरी बकाया-पलायन को मजबूर ग्रामीण, अधूरे कुओं पर भी खतरा
चतरा/कुंदा। कुंदा समेत जिले के सभी प्रखंड क्षेत्र में मनरेगा कर्मियों की हड़ताल लगातार 23वें दिन भी जारी है, जिससे ग्रामीण मजदूरों के सामने गंभीर आजीविका संकट खड़ा हो गया है। मनरेगा के तहत चल रहे सभी कार्य पूरी तरह ठप पड़ गए हैं, जिसके कारण मजदूर रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें पिछले तीन महीनों से मजदूरी का भुगतान नहीं मिला है, जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। हालात ऐसे हैं कि कई मजदूर अपने घर से हजारों किलोमीटर दूर रोजगार की तलाश में जाने को विवश हैं। हड़ताल का असर स्थानीय बाजारों पर भी साफ दिख रहा है। छोटे दुकानदारों का कहना है कि मजदूरों के पलायन के कारण उनके व्यवसाय में भारी गिरावट आई है। पहले मजदूर गांव में रहकर काम करते थे और रोजमर्रा की जरूरतों का सामान खरीदते थे, लेकिन अब ग्राहकों की संख्या काफी कम हो गई है। वहीं मनरेगा के तहत बन रहे बिरसा कूप के लाभुकों में भी चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि समय पर कार्य शुरू नहीं हुआ तो अधूरे पड़े कुएं बरसात में ध्वस्त हो सकते हैं, जिससे उनका नुकसान होगा। ग्रामीणों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि हड़ताल समाप्त कर जल्द से जल्द कार्य शुरू कराया जाए और लंबित मजदूरी का भुगतान किया जाए। फिलहाल किसी ठोस पहल के अभाव में मजदूरों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।





















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