पीने वालों को पीने का बहाना चाहिए… संघर्ष छोड़ सत्ता की शरण में जाना आत्मसम्मान नहीं, सरेंडर है
प्रद्युत बोरदोलोई के फैसले पर कांग्रेस का पलटवार, गोड्से की गोद वाले बयान से गरमाई राजनीति
नई दिल्ली/लोहरदगाः दिल्ली की सियासत उस वक्त गरमा गई जब सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के कांग्रेस से इस्तीफे को लेकर पार्टी के भीतर ही तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने न सिर्फ इस फैसले को सरेंडर करार दिया, बल्कि बेहद आक्रामक अंदाज में भाजपा पर भी निशाना साधा। पीने वालों को पीने का बहाना चाहिए —ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने असम के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के पार्टी छोड़ने पर गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि किसी भी साथी को खोना पीड़ादायक होता है, लेकिन इस तरह का कदम आत्मसम्मान नहीं बल्कि संघर्ष से भागना है। भगत ने तंज कसते हुए कहा कि पीने वालों को पीने का बहाना चाहिए, यानी जो जाना चाहता है, वह किसी न किसी कारण का सहारा ढूंढ ही लेता है। उन्होंने आगे सवाल उठाया कि क्या यह आत्मसम्मान है या फिर सत्ता के सामने समर्पण। अपने बयान को और धार देते हुए उन्होंने कहा कि यह कदम उस विचारधारा की ओर झुकाव दर्शाता है जिसे कांग्रेस लंबे समय से चुनौती देती रही है। *गोडसे की गोद में जाना* जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने इशारों-इशारों में भाजपा पर तीखा हमला बोला। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपनी मनी पावर या अन्य ताकतों का इस्तेमाल कर विपक्षी नेताओं को प्रभावित कर रही है।




















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