छुईखदान सहित विभिन्न क्षेत्रों में बंदनवार, दीपदान और भक्ति कार्यक्रम आयोजित
News Scale Live | छुईखदान (छत्तीसगढ़):
विक्रम संवत 2083 एवं चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ के अवसर पर छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों सहित छुईखदान शहर की कई कॉलोनियों में धार्मिक उत्साह और आस्था का माहौल देखने को मिला। प्रातःकाल घरों एवं मंदिरों के मुख्य द्वार पर आमपत्र-पुष्प से बने बंदनवार को पंचोपचार पूजन के साथ स्थापित किया गया। विक्रम संवत भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण आधार है, जिसके अनुसार हिंदू धर्म के सभी पर्व-त्योहार और शुभ कार्य निर्धारित होते हैं। यह संवत अंग्रेजी कैलेंडर से 57 वर्ष आगे है और चैत्र माह से इसकी शुरुआत होती है। इसे भारतीय अस्मिता, परंपरा और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक माना जाता है।
इस अवसर पर संगठन की मातृशक्ति छुईखदान इकाई की महिलाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में घरों और मंदिरों में पहुंचकर विधि-विधान से बंदनवार लगाया और दीप प्रज्ज्वलित कर नववर्ष का स्वागत किया।
नवरात्रि के प्रथम दिन रानी तालाब स्थित राजपुरोहित कुलदेवी सत्ती माता मंदिर में संध्या कालीन दीपदान एवं पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। मातृशक्तियों ने पंचोपचार पूजन कर भोग प्रसाद अर्पित किया और माता की भक्ति में लीन होकर भजन-कीर्तन एवं गरबा नृत्य प्रस्तुत किया।
नववर्ष के अवसर पर बहनों ने एक-दूसरे को कुमकुम तिलक लगाकर शुभकामनाएं दीं और खुशियां साझा कीं। यह पर्व प्रकृति में परिवर्तन और देवी शक्ति की आराधना का प्रतीक माना जाता है। कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष डॉली तिवारी, जिला सचिव स्वाति शर्मा, जिला उपाध्यक्ष रूपा उपाध्याय, संगठन विस्तार प्रमुख शैल शर्मा सहित रेनू त्रिपाठी, रेणु चौबे, श्यामा तिवारी, अंजू तिवारी, गायत्री तिवारी, विमला शर्मा, सरिता शर्मा, रोहणी शर्मा, मीना तिवारी, लक्ष्मी तिवारी, मनीषा शुक्ला और सीमा मिश्रा समेत अनेक महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इसी तरह खैरागढ़ और गंडई क्षेत्रों में भी कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां खैरागढ़ जिला संयोजिका अंजू पांडे और गंडई जिला प्रभारी उमा चौबे के नेतृत्व में श्रद्धालुओं ने शीतला माता मंदिर में पूजा-अर्चना कर नववर्ष और नवरात्रि का स्वागत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही और पूरा वातावरण भक्ति एवं उल्लास से सराबोर रहा।





















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