चतरा। चतरा जिले में सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर नल-जल योजना पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि जिले के विभिन्न प्रखंडों और पंचायतों में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए मिनी जलमीनार (वाटर टावर) में से लगभग 90 प्रतिशत बंद पड़े हैं या पूरी तरह खराब हो चुके हैं, जिससे ग्रामीणों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर केवल लोहे का ढांचा खड़ा कर दिया गया है और फर्जी फोटो व वाउचर के माध्यम से संवेदकों द्वारा सरकारी राशि की निकासी कर ली गई। कागजों में योजना को पूर्ण दिखा दिया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों को एक बूंद पानी भी नहीं मिल रहा है। यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ जगहों पर जलमीनारों का निजी कार्यों में उपयोग किया जा रहा है, जबकि कई स्थानों पर जमीन देने वाले लोग उस पर मालिकाना हक जताने लगे हैं, जो पूरी तरह अवैध बताया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि इस योजना में संवेदकों और विभागीय पदाधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया है। लोगों का कहना है कि बिना अधिकारियों की निगरानी और सहमति के इतने बड़े पैमाने पर सरकारी राशि की निकासी संभव नहीं है। इस मामले को लेकर विधायक प्रतिनिधि रौशन कुमार सिंह ने राज्य सरकार से पूरे चतरा जिले में हर घर नल-जल योजना की विजिलेंस या एसीबी से उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस कथित घोटाले में शामिल संवेदकों, अभियंताओं और जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए और सभी बंद पड़े जलमीनारों को तत्काल चालू कराने की जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस गंभीर मामले में जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि सरकार इस घोटाले को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर चतरा जिले में इस मुद्दे को लेकर आंदोलन भी किया जाएगा।
हर घर नल-जल योजना में बड़े घोटाले का आरोप, 90 प्रतिशत जलमीनार बंद, उच्च स्तरीय जांच की मांग

On: March 12, 2026 11:12 PM

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