सिमरिया (चतरा)। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर चलाए जा रहे 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान के तहत चतरा जिले में ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान का समापन अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर किया गया। इस मौके पर लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान ने बताया कि अभियान के दौरान लोगों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया से यह विश्वास मजबूत हुआ है कि बाल विवाह मुक्त चतरा का लक्ष्य जल्द ही साकार होगा। जिले में इस रथ को उपायुक्त कीर्तिश्री ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। अभियान के दौरान ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ ने करीब 2267 किलोमीटर की यात्रा करते हुए जिले के 114 गांवों तक पहुंचकर लगभग 1 लाख 20 हजार लोगों को जागरूक किया। इस दौरान गांवों और कस्बों में लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों और इसके कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। साथ ही बताया गया कि बाल विवाह बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय है और यह कानून की नजर में दंडनीय अपराध है। लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान के जिला समन्वयक विकास कुमार गुप्ता ने कहा कि यह अभियान केवल एक जागरूकता यात्रा नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की पहल है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह बच्चियों को कुपोषण, अशिक्षा और गरीबी के दुष्चक्र में धकेल देता है। तीन चरणों में चले इस अभियान के पहले चरण में शैक्षणिक संस्थानों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। दूसरे चरण में धर्मगुरुओं से अपील की गई कि विवाह से पूर्व वर-वधू की आयु की जांच सुनिश्चित करें और बाल विवाह कराने से इनकार करें। तीसरे चरण में पंचायत स्तर पर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई गई। अभियान के दौरान कैटरर्स, सजावट करने वालों, बैंक्वेट हॉल संचालकों, बैंड पार्टी और घोड़ी संचालकों से भी अपील की गई कि वे बाल विवाह में अपनी सेवाएं न दें, क्योंकि ऐसे मामलों में सहयोग देने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
बाल विवाह मुक्ति रथ’ अभियान का समापन, 114 गांवों में चला जागरूकता अभियान

On: March 8, 2026 11:56 PM

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