हंटरगंज (चतरा)। सरकार भले ही विकास के आंकड़े गिनाती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां करती है। चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड अंतर्गत जोलडीहा पंचायत का गुबे गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे इस गांव में करीब 50 घरों के लगभग 500 आदिवासी लोग रहते हैं, लेकिन आजादी के सात दशक बाद भी यहां न सड़क है और न बिजली। ग्रामीणों के अनुसार मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत ग्राम सुरहुद से गुबे तक लगभग 6 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए सितंबर 2024 में शिलान्यास किया गया था, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को जंगली और पहाड़ी रास्तों से होकर बाजार जाना पड़ता है। बीमार पड़ने पर मरीजों को खाट या बाइक के सहारे अस्पताल ले जाया जाता है। प्रसव के समय ममता वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाता, जिससे अधिकतर महिलाओं का प्रसव घर पर ही होता है। इससे मां और नवजात दोनों की जान को खतरा बना रहता है। करीब पांच वर्ष पूर्व गांव में सोलर पैनल लगाए गए थे। उस समय ग्रामीणों में उम्मीद जगी थी कि अब ढिबरी युग से मुक्ति मिलेगी। लेकिन एक वर्ष के भीतर ही सोलर सिस्टम खराब हो गया और उसे ठीक कराने कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। आज भी गांव अंधेरे में डूबा है। बिजली के अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। आधुनिक युग में जहां ऑनलाइन शिक्षा का दौर है, वहीं गुबे गांव के बच्चों का भविष्य अंधकार में नजर आता है। ग्रामीणों ने समस्या को लेकर उपायुक्त को आवेदन दिया है। उनका कहना है कि उपायुक्त ने संबंधित विभागों से बात कर आश्वासन दिया है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द सड़क और बिजली की व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। गांव के लोगों का कहना है कि हर चुनाव में विकास के वादे किए जाते हैं, लेकिन जीत के बाद जनप्रतिनिधि गांव की सुध नहीं लेते। अब ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं, ताकि सुरक्षित आवाजाही हो सके और बच्चों का भविष्य संवर सके।
सात दशक बाद भी अंधेरे में गुबे गांवः न सड़क, न बिजली, जंगल-पहाड़ के सहारे जीवन

On: February 27, 2026 8:51 PM

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