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तालाब के श्मशान घाट पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव, अतिक्रमण की आशंका से ग्रामीण चिंतित

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पारंपरिक श्मशान घाट की जमीन और सीमांकन स्पष्ट करने की मांग, प्रशासन से निष्पक्ष जांच की अपील

चौपारण(हजारीबाग)। प्रखंड के कमलवार तालाब स्थित पारंपरिक श्मशान घाट की बदहाली और उपलब्ध जगह को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने श्मशान घाट के समीप नए कब्रिस्तान के निर्माण और चारदीवारी खड़ी किए जाने के बाद जगह सीमित होने की आशंका जताई है। उन्होंने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से हस्तक्षेप कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार, कमलवार तालाब के किनारे स्थित श्मशान घाट का उपयोग स्थानीय हिंदू समुदाय के लोग वर्षों से अंतिम संस्कार के लिए करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि हाल में श्मशान घाट से सटकर कब्रिस्तान की चारदीवारी बनाए जाने तथा श्मशान घाट की ओर गेट होने से भविष्य में जगह और उपयोग को लेकर परेशानी उत्पन्न हो सकती है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जिस स्थान के समीप श्मशान शेड बनाने के लिए जगह चिह्नित की गई थी, उसके पास ही निर्माण कार्य हुआ है। हालांकि, मामले में वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए स्थल का निष्पक्ष निरीक्षण जरूरी है।

रास्ता और शेड नहीं होने से परेशानी

ग्रामीणों ने बताया कि श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए अब तक पक्के और व्यवस्थित रास्ते की व्यवस्था नहीं हो सकी है। बरसात के दिनों में शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वहीं, श्मशान घाट पर शेड नहीं होने के कारण बारिश और तेज धूप में अंतिम संस्कार करना भी मुश्किल हो जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि इन समस्याओं को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। उन्होंने श्मशान घाट के लिए किसी दूसरे स्थान, विशेषकर जंगल की ओर, जगह तलाशने की सलाह दिए जाने पर भी चिंता जताई है। ग्रामीण चाहते हैं कि वर्षों से उपयोग में आ रहे पारंपरिक श्मशान घाट की वर्तमान स्थिति और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाए।

समय रहते पहल की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से श्मशान घाट और कब्रिस्तान की जमीन का निरीक्षण कराने, दोनों स्थलों की सीमाओं का स्पष्ट सीमांकन करने तथा श्मशान घाट तक पहुंच पथ और शेड जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि दोनों समुदायों के धार्मिक स्थलों से जुड़ा मामला संवेदनशील है। ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले दोनों पक्षों की बात सुनना और तथ्यों के आधार पर उचित समाधान निकालना जरूरी है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि समय रहते प्रशासनिक पहल नहीं हुई तो भविष्य में असहज स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

ग्रामीणों ने जिला एवं प्रखंड प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर पारंपरिक श्मशान घाट के उपयोग, उपलब्ध जमीन और आवश्यक सुविधाओं को लेकर स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की है, ताकि किसी भी प्रकार के विवाद की आशंका को समय रहते दूर किया जा सके।

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