भंडरा। प्रखंड क्षेत्र में करमा का त्योहार हर्षोल्लास, पारंपरिक रीति-रिवाज और आपसी भाईचारे के साथ मनाया गया। मिडिल स्कूल स्थित मुख्य अखड़ा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में करमा पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।
मंगलवार की शाम मुख्य अखड़ा में पहान इंद्रदेव उरांव एवं शशिकांत उरांव ने विधि-विधान के साथ करमा का मुख्य अनुष्ठान संपन्न कराया। पूजा के दौरान करम देव की आराधना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और परिवारों की खुशहाली की कामना की गई।
बुधवार को पारंपरिक वाद्य यंत्र मांदर और नगाड़ों की गूंज के बीच बहनों ने करम डाली के साथ भव्य नगर भ्रमण किया। इस दौरान करमा गीतों और पारंपरिक नृत्यों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। नगर भ्रमण के बाद बहनों ने करम डाली को भंडरा तालाब में विधिवत विसर्जित किया।
इस अवसर पर पहान इंद्रदेव उरांव ने करमा पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम, प्रकृति संरक्षण और कर्म की प्रधानता का प्रतीक है। उन्होंने करमा पर्व से जुड़ी कर्मा और धर्मा नामक दो भाइयों की कथा भी सुनाई। उन्होंने बताया कि कर्मा द्वारा अनजाने में करम देव का अपमान किए जाने के कारण उसके जीवन से सुख-समृद्धि चली गई। बाद में अपनी भूल का अहसास होने पर कर्मा ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए करम देव को प्रसन्न किया, जिसके बाद उसके जीवन में दोबारा खुशहाली लौटी।
उन्होंने कहा कि ‘करम’ ही जीवन का वास्तविक आधार है। प्रकृति से जुड़कर सच्चे मन से कर्म करने वाले व्यक्ति की रक्षा स्वयं भगवान करते हैं। करमा पर्व हमें प्रकृति के प्रति सम्मान, मेहनत और भाई-बहन के प्रेम का संदेश देता है।
करमा पर्व के दौरान मुख्य अखड़ा समेत पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल रहा। सेमरा, मसमानो, भौंरो, बेदाल, चट्टी, अकाशी और नौडीहा सहित विभिन्न गांवों में भी लोगों ने पारंपरिक तरीके से करमा पर्व मनाया। गांवों में देर रात तक करमा गीत और पारंपरिक नृत्य चलते रहे। पर्व ने ग्रामीणों के बीच आपसी सौहार्द, एकजुटता और भाईचारे की भावना को और मजबूत किया।






















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