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के.बी. महिला कॉलेज में ₹6.86 लाख की वित्तीय गड़बड़ी का मामला फिर गरमाया

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विश्वविद्यालय की जांच समिति ने की थी कार्रवाई और राशि वसूली की अनुशंसा, अब राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग

हजारीबाग। के.बी. महिला महाविद्यालय, हजारीबाग के क्लीनिकल न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स (CND) विभाग में सामने आई ₹6,86,870 की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला एक बार फिर चर्चा में है। विनोबा भावे विश्वविद्यालय की तीन सदस्यीय जांच समिति ने वित्तीय वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 के दौरान छात्रों से प्राप्त परीक्षा शुल्क और बैंक में जमा राशि के बीच यह अंतर पाए जाने की बात कही थी।

जांच समिति ने संबंधित संविदा कर्मी के विरुद्ध कार्रवाई, राशि की वसूली और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा की थी। हालांकि, वर्षों बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए झारखंड छात्र मोर्चा, विनोबा भावे विश्वविद्यालय के अध्यक्ष चंदन सिंह ने राज्यपाल सह कुलाधिपति को आवेदन देकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

‘जांच रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?’

चंदन सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब विश्वविद्यालय की अपनी जांच समिति ने वित्तीय अनियमितता सामने रखी और कार्रवाई की अनुशंसा की, तो अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जांच के निष्कर्ष के आधार पर दोष तय करने के साथ राशि की वसूली और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल जांच समिति गठित कर देना पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं होने से विश्वविद्यालय की वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल उठते हैं।

कई मामलों में कार्रवाई लंबित रहने का आरोप

चंदन सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़े कई मामले सामने आते रहे हैं। उनका आरोप है कि कई मामलों में जांच नहीं होती या समिति गठित होने के बाद कार्रवाई लंबित रह जाती है।

उन्होंने राज्यपाल सह कुलाधिपति से मांग की कि CND विभाग से जुड़े मामले में जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्काल कार्रवाई, राशि की वसूली और दोषी पाए जाने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाए।

साथ ही उन्होंने जांच रिपोर्ट के बावजूद लंबे समय तक कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की। चंदन सिंह ने कहा कि यदि मामले में शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती है तो जनहित में उचित संवैधानिक एवं कानूनी मंच का सहारा लिया जाएगा।

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