धांधली के खिलाफ सरकार का बड़ा फैसला, नौकरी गंवाने वाले अभ्यर्थियों ने उठाए सवाल; निर्दोषों के भविष्य पर भी मंडराया संकट
रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार के एक बड़े फैसले ने हजारों अभ्यर्थियों और उनके परिवारों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। जेएसएससी और जेपीएससी की परीक्षाओं का संचालन करने वाली टीडीपीएल एजेंसी पर अनियमितता और पेपर लीक के आरोपों के बीच सरकार ने वर्ष 2014 से अब तक एजेंसी द्वारा आयोजित 15 प्रमुख परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया है। इनमें 10 जेपीएससी और 5 जेएसएससी की परीक्षाएं शामिल हैं।
इस फैसले का सबसे बड़ा असर जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा से चयनित करीब 1,975 अभ्यर्थियों पर पड़ा है। इसके अलावा 14वीं सिविल सेवा परीक्षा के 103 पद, सिविल सेवा बैकलॉग 2023 के 7 पद और 2025 के 45 पद समेत फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर के 170, सहायक वन संरक्षक के 78, एपीपी नियमित के 134, एपीपी बैकलॉग के 26 और सिविल जज जूनियर के 38 पदों से जुड़ी परीक्षाएं भी रद्द कर दी गई हैं।
धांधली के खिलाफ कार्रवाई, लेकिन निर्दोष अभ्यर्थियों का क्या?
सरकार के फैसले से जहां लंबे समय से परीक्षा में कथित धांधली के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्र संगठनों में राहत है, वहीं चयनित और नियुक्त अभ्यर्थियों में आक्रोश है। नौकरी गंवाने वाले अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि परीक्षा में कुछ लोगों ने गलत तरीके से सफलता हासिल की है तो उनकी पहचान कर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द कर सभी सफल अभ्यर्थियों को दोषी ठहराना उचित नहीं है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि कई युवाओं ने सरकारी नौकरी मिलने के बाद अपनी पुरानी नौकरियां छोड़ीं, परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां संभालीं और अपने भविष्य की योजनाएं बनाईं। अब एक फैसले के बाद उनके सामने दोबारा बेरोजगारी का संकट खड़ा हो गया है।
सरकार ने गठित की उच्चस्तरीय समिति
रांची में लगातार चल रहे छात्र आंदोलन और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर बढ़ते दबाव के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की भी घोषणा की है।
अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि धांधली के दोषियों पर कार्रवाई के साथ उन अभ्यर्थियों के भविष्य की सुरक्षा कैसे होगी, जिन पर किसी तरह की गड़बड़ी में शामिल होने का आरोप नहीं है। एक तरफ सरकार पारदर्शी भर्ती व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ हजारों अभ्यर्थियों और उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी और भविष्य का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।























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