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शिक्षा विभाग में एसीबी का बड़ा धमाका: प्रधान लिपिक और रिटायर्ड शिक्षक रिश्वत लेते गिरफ्तार; रांची ले गई टीम

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2 गाड़ियों में पहुंचे दर्जनों अधिकारियों ने कार्यालय को घेरे में लिया, 1 घंटे तक की गहन पूछताछ; नए समाहरणालय परिसर में एसीबी की पहली बड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप

न्यूज स्केल लाइव ब्यूरो

गुमला। गुमला जिले से एक बेहद सनसनीखेज और बड़ी खबर सामने आई है। गुमला समाहरणालय परिसर स्थित जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) कार्यालय में पैर पसार चुके भ्रष्टाचार के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), रांची की टीम ने एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। एसीबी की टीम ने दविश देकर शिक्षा विभाग में कार्यरत प्रधान लिपिक (Head Clerk) रंजीत कुजूर और एक सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) शिक्षक वत्स रविकांत को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार (Arrested Red-Handed) कर लिया है।

इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई के बाद एसीबी की टीम दोनों आरोपियों को विधिक कस्टडी में लेकर रांची के लिए रवाना हो गई है। इस संबंध में रांची से आई एसीबी टीम की अगुवाई कर रहे माननीय पुलिस उपाधीक्षक (DSP) ने आधिकारिक रूप से बताया कि रिश्वतखोरी के एक पुख्ता इनपुट और जाल बिछाकर (Trap Case) दो लोगों को विधिक रूप से गिरफ्तार किया गया है, जिनकी विस्तृत और तकनीकी जानकारी रांची मुख्यालय कार्यालय से प्रेस विज्ञप्ति के जरिए जारी की जाएगी।

दलबल के साथ पहुंची टीम ने पूरे दफ्तर को घेरा, आने-जाने पर लगाई पाबंदी

‘न्यूज स्केल लाइव’ को ग्राउंड जीरो से मिली प्रामाणिक जानकारी के अनुसार, मंगलवार को दो फोर व्हीलर (चार पहिया वाहनों) में सवार होकर दर्जनों की संख्या में आए एसीबी के सशस्त्र अधिकारियों और इंस्पेक्टरों ने अचानक नए समाहरणालय भवन में प्रवेश किया। एसीबी की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से सीधे जिला शिक्षा कार्यालय को अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया और कार्यालय के भीतर किसी भी बाहरी व्यक्ति या कर्मी के आने-जाने पर विधिक पाबंदी लगा दी।

इस औचक दबिश से समाहरणालय परिसर में स्थित लगभग सभी सरकारी कार्यालयों के अधिकारियों और बाबुओं में हड़कंप मच गया और कई अफसर अपने कक्ष छोड़कर भागते नजर आए। टीम ने प्रधान लिपिक रंजीत कुजूर और रिटायर्ड शिक्षक रविकांत को हिरासत में लेकर बंद कमरे में घंटों तक गहन पूछताछ की और रिश्वत की राशि व संबंधित विधिक फाइलों को साक्ष्य के रूप में जब्त कर लिया।

नए समाहरणालय परिसर में पहली विधिक स्ट्राइक, अन्य विभागों में भी खलबली

उल्लेखनीय है कि गुमला के इस नवनिर्मित और भव्य समाहरणालय परिसर पर एसीबी टीम की यह अब तक की पहली बड़ी दंडात्मक कार्रवाई हुई है। चूंकि इस मुख्य समाहरणालय भवन में जिला के तमाम आला प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के भी कार्यालय हैं, इसलिए इस हाई-प्रोफाइल रेड के दौरान पूरे परिसर में वीआईपी और आम लोगों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।

कार्यालय के बाहर लोग गुफ्तगू और कानाफूसी करते हुए साफ नजर आ रहे थे कि जब जिला मुख्यालय के नाक के नीचे, शिक्षा विभाग जैसे पवित्र महकमे में रिश्वतखोरी का यह खेल इतनी बेखौफ और धड़ल्ले से चल रहा है, तो सुदूरवर्ती क्षेत्रों और अन्य तकनीकी विभागों में भ्रष्टाचार का क्या आलम होगा।

                  गुमला शिक्षा विभाग एसीबी ट्रैप केस: एक नजर में
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│ मुख्य कार्रवाई विंग             │ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), रांची टीम      │
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│ घटनास्थल                      │ जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय, समाहरणालय, गुमला│
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│ गिरफ्तार मुख्य लोक सेवक        │ रंजीत कुजूर (प्रधान लिपिक / हेड क्लर्क)        │
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│ गिरफ्तार सह-अभियुक्त          │ वत्स रविकांत (सेवानिवृत्त / रिटायर्ड शिक्षक)     │
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│ टीम के कमान अधिकारी            │ माननीय डीएसपी (DSP), एसीबी रांची              │
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│ प्राथमिक विधिक जुर्म          │ लोक सेवक द्वारा अवैध परितोषण (रिश्वत) की मांग व स्वीकार│
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│ वर्तमान कानूनी स्थिति          │ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज, रांची जेल रवाना│
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भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज होगी एफआईआर, स्पीडी ट्रायल की तैयारी

एसीबी के सूत्रों के अनुसार, इस घूसखोरी कांड को लेकर पूर्व में ही एक पीड़ित (शिकायतकर्ता) द्वारा रांची मुख्यालय में विधिक शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके सत्यापन के बाद यह सफल ट्रैप आयोजित किया गया।

दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की सुसंगत कड़ी दंडात्मक धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। एसीबी कोर्ट, रांची में दोनों को पेश कर रिमांड पर लेने की विधिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि इस रैकेट में शामिल विभाग के अन्य बड़े अधिकारियों की संलिप्तता का भी पर्दाफाश किया जा सके।

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