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बच्चों के सिर के ठीक ऊपर से गुजर रही 11,000 वोल्ट की हाई-टेंशन लाइन; बिजली विभाग ने मूंदी आंखें

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उत्क्रमित उच्च विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक और ग्रामीणों ने लगाई गुहार; शिक्षकों ने कहा— ‘हर पल बना रहता है जान का खतरा’; सुरक्षा नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाने वाले अधिकारियों पर विधिक कार्रवाई की मांग

हजारीबाग जिले के चौपारण प्रखंड अंतर्गत बरहमौरिया ग्राम स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय (अपग्रेडेड हाई स्कूल) से सरकारी तंत्र की घोर संवेदनहीनता और बिजली विभाग की एक बेहद डरावनी व जानलेवा लापरवाही की तस्वीर सामने आई है। यहाँ देश के भविष्य यानी मासूम स्कूली बच्चों और शिक्षकों की जिंदगी को पूरी तरह दांव पर लगा दिया गया है। विधिक और धरातलीय स्थिति यह है कि विद्यालय मुख्य भवन और पूरे खेल प्रांगण (कैम्पस) के ठीक ऊपर से 11,000 वोल्ट (11 KV) की हाई-टेंशन बिजली की नंगी तारें सरेआम गुजर रही हैं। इसके कारण स्कूल में पढ़ने वाले सैकड़ों मासूम बच्चों के सिर पर हर सेकंड मौत का साया मंडराता रहता है।

प्रधानाध्यापक भागीरथ रविदास ने खोला मोर्चा, स्कूल निर्माण के समय से ही विभाग बेपरवाह

इस गंभीर और जानलेवा विधिक समस्या को लेकर शनिवार को विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक भागीरथ रविदास के कड़े नेतृत्व में स्थानीय ग्रामीणों और स्कूल प्रबंधन समिति की एक आपात बैठक हुई। प्रधानाध्यापक और प्रबुद्ध ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व बिजली विभाग के आला अधिकारियों से इस मौत के तार को विद्यालय परिसर से तुरंत हटाने की विधिक गुहार लगाई है।

शिक्षकों और स्कूल स्टाफ ने कड़े शब्दों में अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि बरसात के दिनों में या तेज हवा चलने पर जब ये तारें आपस में टकराती हैं या नीचे झुक जाती हैं, तो पूरे परिसर में करंट उतरने का खौफनाक खतरा पैदा हो जाता है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि स्कूल भवन के निर्माण के समय से ही स्थानीय स्तर पर कई बार लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन बिजली विभाग के कनीय और सहायक अभियंताओं ने इस गंभीर विधिक समस्या पर जानबूझकर अपनी आंखें मूंद रखी हैं, जो कि मानवाधिकार और बाल सुरक्षा नियमों के पूरी तरह खिलाफ है।

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सुरक्षा मानकों को ठेंगा दिखा रहा बिजली विभाग, ग्रामीण उग्र आंदोलन के मूड में

ग्रामीणों ने कड़े लहजे में कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान या आवासीय परिसर के ठीक ऊपर से इतनी हाई वोल्टेज की नंगी लाइन ले जाना भारतीय विद्युत अधिनियम (Indian Electricity Act) के कड़े सुरक्षा मानकों का सरेआम विधिक उल्लंघन है।

स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों ने चेतावनी दी है कि यदि बिजली विभाग ने कुंभकर्णी नींद से जागकर इस हाई-टेंशन तार को विद्यालय परिसर से बाहर शिफ्ट करने की विधिक प्रक्रिया अविलंब शुरू नहीं की, तो किसी भी अनहोनी की पूरी जिम्मेदारी विभाग की होगी। ऐसी स्थिति में ग्रामीण और छात्र चौपारण बिजली सब-स्टेशन का घेराव कर कड़ा व उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

अपील और विरोध प्रदर्शन के दौरान ये मुख्य शिक्षक और ग्रामीण रहे उपस्थित

बरहमौरिया स्कूल परिसर में विभागीय तानाशाही के खिलाफ एकजुट हुए इस कड़े प्रशासनिक शिष्टमंडल में मुख्य रूप से: विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक भागीरथ रविदास, कड़क शिक्षक वीरेंद्र कुमार मौर्य, प्रबुद्ध शिक्षक राजकुमार साहू, अनुज कुमार वैद्य, रामजीवन सिंह, सुधांशु कुमार इंद्र गुरु, रामभरोस यादव, संतोष कुमार सिंह, पप्पू कुमार रविदास, स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के सम्मानित सदस्य पवन कुमार इंद्र गुरु सहित बरहमौरिया गांव के दर्जनों प्रबुद्ध ग्रामीण, अभिभावक और युवा मुख्य रूप से उपस्थित थे। सभी ने एकजुट होकर बच्चों के विधिक शिक्षा और सुरक्षा के अधिकार के लिए आर-पार की लड़ाई का कड़ा संकल्प दोहराया है।

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