29 मामलों के आरोपी सरगना के पास से अत्याधुनिक स्वचालित हथियार और भारी मात्रा में कारतूस बरामद; सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर डाला हथियार
न्यूज स्केल लाइव ब्यूरो
रांची/गुमला: रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) को मिली सटीक गुप्त सूचना के आधार पर शनिवार, 30 मई 2026 को रांची और गुमला जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने संयुक्त जाल बिछाकर कुख्यात ‘झांगुर ग्रुप’ के प्रमुख और 5 लाख रुपये के इनामी अपराधी रामदेव उरांव (47 वर्ष) को उसके दो सक्रिय सदस्यों के साथ बेड़ो थाना क्षेत्र के लमकाना (रांची-गुमला सीमा) से दबोच लिया। दबाव में आए अपराधियों ने खुद को चारों तरफ से घिरा देख झारखंड सरकार की पुनर्वास और आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होने की बात कही और बिना किसी प्रतिरोध के पुलिस टीम के सामने अपने अत्याधुनिक हथियार डाल दिए।
संयुक्त पुलिस टीम के सामने घुटने टेकने वाले अपराधियों की पहचान इस प्रकार हुई है:
रामदेव उरांव (सरगना – उम्र 47 वर्ष): मुख्य सरगना, जो गुमला जिले के बिशुनपुर थाना अंतर्गत देवरागानी (पो० सातो) का रहने वाला है। इस पर सरकार ने 5 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।
प्रसाद उरांव (उम्र 24 वर्ष): पिता- बालदेव उरांव, निवासी- देवरागानी, गुमला।
सुबास उरांव (उम्र 23 वर्ष): पिता- मुन्ना उरांव, निवासी- देवरागानी, गुमला। (प्रसाद और सुबास को गिरोह का सक्रिय रणनीतिकार माना जाता था, जो कई बड़ी घटनाओं में रामदेव के साथ शामिल रहे थे।)
स्वचालित हथियारों का जखीरा और जिंदा कारतूस बरामद
आत्मसमर्पण के दौरान पुलिस ने इस गिरोह के पास से घातक और प्रतिबंधित हथियारों का जखीरा बरामद किया है। जब्त किए गए हथियारों का विवरण इस प्रकार है:
एक स्वचालित हथियार: जिसकी बॉडी पर A56-2 571072 अंकित है। इसके साथ एक मैगजीन और 30 चक्र जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं।
एक स्वचालित एसएलआर (SLR) राइफल: इसके साथ भी एक मैगजीन तथा 15 चक्र जिंदा कारतूस जब्त किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, इन घातक हथियारों का इस्तेमाल यह गिरोह मुख्य रूप से कोयलांचल और सीमावर्ती क्षेत्रों में लेवी (रंगदारी) वसूलने और अपनी दहशत कायम रखने के लिए करता था।
दर्ज हैं 29 मामले, साल 2000 से मचा रखी थी तबाही
झांगुर ग्रुप के सरगना रामदेव उरांव का आपराधिक इतिहास बेहद खौफनाक रहा है। उसके खिलाफ विभिन्न थानों में हत्या, अपहरण, रंगदारी और आर्म्स एक्ट के करीब 29 गंभीर मामले दर्ज हैं।
पहला अपराध: रामदेव के खिलाफ वर्ष 2000 में घाघरा थाने में हत्या और लूट का पहला मामला (काण्ड सं०-52/2000) दर्ज हुआ था।
हालिया कांड: हाल ही में वर्ष 2024 में बिशुनपुर में हत्या (काण्ड सं०-07/24) और जनवरी 2025 में नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज कांड संख्या-03/25 में भी वह मुख्य आरोपी था।
वहीं, उसके साथी प्रसाद उरांव पर वर्ष 2018 में हत्या-अपहरण और सुबास उरांव पर भी बिशुनपुर थाना के कांड संख्या-03/25 में सह-आरोपी के रूप में मामले दर्ज हैं।
अभियान को सफल बनाने वाली जांबाज टीम
रांची ग्रामीण एसपी और गुमला एसपी के निर्देश पर बेड़ो डीएसपी दीपक कुमार के नेतृत्व में बनी इस संयुक्त विशेष टीम में दोनों जिलों के जांबाज अधिकारी शामिल थे:
रांची टीम: बेड़ो के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) दीपक कुमार, अंचल पुलिस निरीक्षक उत्तम कुमार उपाध्याय, बेड़ो थाना प्रभारी मोहम्मद कफील अहमद, पुअनि उत्तम कुमार पासवान और पुअनि शौकत अली।
गुमला टीम: घाघरा थाना प्रभारी सह पुलिस अवर निरीक्षक (SI) मोहन कुमार सिंह और पुलिस अवर निरीक्षक विकास कुमार।
दोनों जिलों के सशस्त्र बल के जवानों ने मिलकर इस बेहद संवेदनशील आत्मसमर्पण अभियान को बिना किसी चूक के पूरी तरह सुरक्षित और सफल बनाया।





















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