प्रखंड मुख्यालय और स्वास्थ्य केंद्रों से कटा संपर्क, बरसात से पहले बढ़ा डर; मुखिया ने दो बार निजी खर्च से कराया था मरम्मत, अब आंदोलन की चेतावनी
न्यूज स्केल लाइव
गिद्धौर (चतरा): गिद्धौर प्रखंड अंतर्गत बरियातू पंचायत से एक बड़ी जन-समस्या सामने आ रही है, जहाँ भुरकुंडा से बरियातू गांव को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण पुल पिछले करीब 15 महीनों (सवा साल) से जर्जर और पूरी तरह क्षतिग्रस्त अवस्था में पड़ा हुआ है। इस लाइफलाइन पुल के ध्वस्त हो जाने से क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों को रोजाना भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन और स्थानीय विधायकों-सांसदों की अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है और जल्द से जल्द पुल के पुनर्निर्माण की मांग की है।
कई गांवों का मुख्य संपर्क मार्ग हुआ ठप
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि यह पुल और मार्ग केवल दो गांवों को नहीं जोड़ता, बल्कि भुरकुंडा, महुआटांड़, लुभदिया, और गड़के सहित आधा दर्जन गांवों को प्रखंड मुख्यालय, पंचायत सचिवालय, स्कूलों, कॉलेजों, स्वास्थ्य केंद्रों और स्थानीय बाजारों से जोड़ने का एकमात्र प्रमुख रास्ता है। पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण इन गांवों की पूरी लाइफलाइन प्रभावित हो गई है। सबसे ज्यादा परेशानी रोज स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल ले जाने के दौरान उठानी पड़ रही है।
मुखिया डेगन गंझू ने दो बार निजी खर्च से कराया था प्रयास
ग्रामीणों की इस बेहद गंभीर समस्या और लाचारी को देखते हुए स्थानीय मुखिया डेगन गंझू ने सराहनीय कदम उठाया था। उन्होंने अपने निजी कोष (निजी खर्च) से दो बार इस पुल की मरम्मत कराकर अस्थाई रूप से आवागमन बहाल करने का प्रयास किया।
लेकिन भारी वाहनों के दबाव और कंक्रीट का स्थायी ढांचा न होने के कारण यह अस्थाई मरम्मत अधिक दिनों तक टिक नहीं सकी और पुल पुनः क्षतिग्रस्त हो गया। हैरान करने वाली बात यह है कि मुखिया के इस प्रयास के बाद भी न तो जिला प्रशासन की नींद खुली और न ही क्षेत्र के सांसद या विधायक ने सुध ली।
बरसात में बन जाते हैं बाढ़ जैसे हालात, समय और धन की बर्बादी
स्थानीय लोगों का कहना है कि आने वाले बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। जब नदी का जलस्तर बढ़ता है, तो रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है। लंबी दूरी का चक्कर: पुल टूटने के कारण ग्रामीणों को कई किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर वैकल्पिक और खराब रास्तों से गुजरना पड़ता है, जिससे उनके समय और पैसे दोनों की भारी बर्बादी होती है। हादसे का डर: कई बार मजबूरी और जल्दबाजी में ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर टूटे हुए नदी के मलबे और पुल के ऊपर से ही पार होते हैं, जिससे हमेशा किसी बड़ी अनहोनी का खतरा मंडराता रहता है।
मांग पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की दी चेतावनी
ग्रामीणों ने तीखा आक्रोश जताते हुए आरोप लगाया कि समस्या को लेकर कई बार लिखित और मौखिक रूप से संबंधित विभाग (ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल/आरईओ) और बड़े जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस या स्थायी पहल नहीं की गई। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता आज गायब हैं।
क्षेत्रवासियों ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि यदि मानसून (बरसात) की शुरुआत से पहले पुल की मरम्मत या नए पुल के निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिली, तो बरियातू पंचायत के सभी गांवों के लोग सड़कों पर उतरकर वृहद आंदोलन करने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने चतरा उपायुक्त रवि आनंद से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है।






















Total Users : 996018
Total views : 2767170