लोहरदगा-स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, समाजसेवी सह लोहरदगा सांसद श्री सुखदेव भगत के पिता स्वर्गीय गंधर्व भगत की 18वीं पुण्यतिथि उनके लोहरदगा स्थित आवासीय परिसर में श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सर्वप्रथम परिजनों द्वारा पारंपरिक ढंग से पूजा-अर्चना की गई, जिसके बाद क्षेत्र के सैकड़ों गणमान्य लोगों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
परिजनों ने की पारंपरिक पूजा-अर्चना
पुण्यतिथि कार्यक्रम की शुरुआत स्वर्गीय गंधर्व भगत के ज्येष्ठ पुत्र दुर्गा भगत, कनिष्ठ पुत्र सह लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत, पुत्रवधू चंद्रपति भगत, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष अनुपमा भगत, पौत्र सह युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव अभिनव सिद्धार्थ, पौत्र वधू अंजलि टोप्पो और पौत्र शाश्वत सिद्धार्थ द्वारा संयुक्त रूप से पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर की गई।
रामगढ़ अधिवेशन और तिरंगा फहराने का ऐतिहासिक संस्मरण
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित वक्ताओं ने स्वर्गीय गंधर्व भगत के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने देश के स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर अपनी सहभागिता निभाई थी।
साइकिल से पहुंचे थे रामगढ़: वर्ष 1942 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में जब भारत छोड़ो आंदोलन का शंखनाद हुआ और रामगढ़ में ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित हुआ, तब स्वर्गीय भगत अपने सहपाठियों के साथ साइकिल से रामगढ़ पहुंचे थे।
अंग्रेजों को दी थी चुनौती: आंदोलन के दौरान स्वर्गीय गंधर्व भगत ने अपने साथी स्वर्गीय रंथुटाना भगत और स्वर्गीय मल्लिक सेराज के साथ मिलकर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ बड़ा पोस्ट ऑफिस में साहसपूर्वक तिरंगा झंडा फहराया था।
”आजादी के बाद भी वे सामाजिक कार्यों में निरंतर सक्रिय रहे और समाज के उत्थान के लिए काम करते रहे। आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके दिखाए आदर्शों और राष्ट्रभक्ति के मार्ग को अपने जीवन में आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”
स्वर्गीय गंधर्व भगत की स्मृति में आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा में क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया




















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