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खबर का बड़ा असर: विभाग को भनक तक नहीं थी, न्यूज़ चली तो लाचार दिव्यांगों के घर पहुंची टीम, अब कागज बनवाना प्रशासन की जिम्मेदारी!

On: April 28, 2026 10:31 PM
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‘मिशन वात्सल्य’: जानकारी के अभाव में योजना से पूरी तरह ‘वंचित’ थे अनाथ बच्चे; ‘News Scale Live’ की पहल के बाद घर बैठे आधार और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की उठी मांग

प्रतापपुर (चतरा): झारखंड के चतरा जिले में जब बेबस और लाचार लोगों की आवाज प्रशासन तक नहीं पहुंचती, तो मीडिया वह पुल बनता है जो सोए हुए सिस्टम को जगाता है। प्रतापपुर में ‘मिशन वात्सल्य’ योजना से ‘वंचित’ गरीब और अनाथ बच्चों का मुद्दा जब News Scale Live पर प्रमुखता से प्रसारित किया गया, तो इसका सीधा असर देखने को मिला। हैरानी की बात यह है कि बाल संरक्षण विभाग को इन दिव्यांग और बेसहारा परिवारों के बारे में पहले से कोई जानकारी ही नहीं थी। खबर के प्रसारण के बाद प्रशासन नींद से जागा और आनन-फानन में विभाग की एक टीम को प्रतापपुर भेजा गया।

यह पूरा मामला प्रतापपुर क्षेत्र की रहने वाली दो विधवा महिलाओं— रुनिया देवी और सूर्यमनिया देवी से जुड़ा है। सरकार की ‘मिशन वात्सल्य’ (स्पॉन्सरशिप योजना) के तहत ऐसे अनाथ बच्चों के लालन-पालन और शिक्षा के लिए हर महीने 4,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। दोनों महिलाओं ने अपनी बेबसी बताते हुए कहा, “हम दोनों पैरों से दिव्यांग हैं, हम कहां जाएं? कहीं आ-जा नहीं सकते और कागजों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाना हमारे लिए मुमकिन नहीं है।” अपनी इसी शारीरिक लाचारी के कारण उनके पास न तो बच्चों का ‘आधार कार्ड’ है और न ही पति का ‘मृत्यु प्रमाण पत्र’। यही वजह है कि वे अब तक इस सरकारी योजना के लाभ से पूरी तरह ‘वंचित’ थीं और विभाग भी उनसे बेखबर था।

जब इस लाचारी की खबर न्यूज़ स्केल लाइव के जरिए अधिकारियों तक पहुंची, तो बाल संरक्षण इकाई की ओर से पीओएनआईसी लक्ष्मण कुमार और आउटरीच वर्कर नीतीश रंजन सिंह तुरंत इन दिव्यांग महिलाओं के घर पहुंचे और उनकी दयनीय स्थिति का जायजा लिया। चूंकि ये महिलाएं चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं, इसलिए अब यह पूरी जिम्मेदारी विभाग और प्रशासन की बनती है कि वे संबंधित विभागों (प्रखंड कार्यालय) के साथ समन्वय स्थापित कर इन महिलाओं के घर पर ही बच्चों का आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र और पति का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की व्यवस्था करें। कागज तैयार होने के बाद ही इन अनाथ बच्चों को 4000 रुपये प्रतिमाह का लाभ मिल सकेगा।

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि समाज के ऐसे सभी बच्चे जिनके माता-पिता या पिता का साया उठ गया है और आर्थिक स्थिति खराब है, उन्हें ‘मिशन वात्सल्य’ के तहत सरकार की सारी सुविधाएं मिलेंगी। समाचार के माध्यम से उठाया गया यह मुद्दा अब समाधान की दिशा में बढ़ता नजर आ रहा है। यह पहल साबित करती है कि अगर मीडिया जिम्मेदारी से आवाज उठाए, तो सिस्टम को लाचार लोगों के दरवाजे तक आना ही पड़ता है।

Also Read: प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता: पन्नी के नीचे जिंदगी गुजार रहे 4 बच्चे और 2 दिव्यांग विधवाएं, बाल संरक्षण विभाग बेखबर

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