करोड़ों की वन संपदा और जड़ी-बूटियां जलकर खाक, जमीन पर अवैध कब्जे के लिए साजिश के तहत आग लगाने की आशंका, वन विभाग पर उठे सवाल
प्रतापपुर (चतरा), न्यूज स्केल: झारखंड के चतरा जिले में “वन है तो हम हैं” का नारा जमीनी हकीकत से कोसों दूर नजर आ रहा है। जिले के प्रतापपुर वन क्षेत्र अंतर्गत अमझर जंगल में अचानक भड़की भीषण आग ने लगभग 2 से 3 किलोमीटर के दायरे को अपनी चपेट में ले लिया। इस विनाशकारी आग ने एक तरफ बेशकीमती वन संपदा और वन्य जीवों को भारी नुकसान पहुंचाया है, वहीं दूसरी तरफ वन विभाग की सुस्त निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस भीषण अग्निकांड की जानकारी तब सामने आई जब सोशल मीडिया से जुड़े स्थानीय निवासी सिराज खान ने जंगल में धधकती आग की लपटों को देखा। उन्होंने बिना देर किए तत्काल वन विभाग को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही डीएफओ (DFO) के निर्देश पर प्रतापपुर वन क्षेत्र की टीम सक्रिय हुई, लेकिन तब तक आग एक बड़े इलाके में फैल चुकी थी। बुधवार देर शाम तक टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। अगर समय पर सूचना न मिलती, तो तबाही और भी बड़ी हो सकती थी।
Also Read: कुख्यात अपराधी गिरफ्तार, रंगदारी मामले में बड़ी कार्रवाई, व्हाट्सएप कॉल से मांग रहा था रंगदारी
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि हर वर्ष गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटनाएं होती हैं, इसके बावजूद वन विभाग द्वारा पहले से पर्याप्त निगरानी और रोकथाम के उपाय नहीं किए जाते। ग्रामीणों ने एक बेहद गंभीर आशंका जताई है कि यह आग प्राकृतिक नहीं है, बल्कि जंगल की जमीन को खाली कराकर उस पर अवैध कब्जा करने की नीयत से भू-माफियाओं या असामाजिक तत्वों द्वारा जानबूझकर लगाई गई है। आग से हुआ भारी नुकसान: जंगल में लगी इस भीषण आग से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को गहरा आघात पहुंचा है:
वन संपदा: सदियों पुरानी बहुमूल्य जड़ी-बूटियां और पौधे जलकर नष्ट हो गए।
वन्य जीव: जंगली जानवरों और पक्षियों का जीवन व उनके आश्रय स्थल छिन गए।
पर्यावरण: बड़े-बड़े पेड़ झुलस कर सूख गए, जिससे हरियाली समाप्त हो रही है और प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है।
अतिक्रमण: आग से खाली हुई जमीन पर भविष्य में अतिक्रमण की संभावना बढ़ गई है।
इस संदर्भ में पूछे जाने पर वन कर्मी अंकित कुमार ने बताया कि जिन असामाजिक तत्वों ने जंगल में आग लगाकर यह भारी नुकसान पहुंचाया है, उन्हें तेजी से चिह्नित किया जा रहा है। जल्द ही उनके खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आम लोगों से भी अपील की है कि वे वन संरक्षण की जिम्मेदारी समझें और जंगल बचाने में सहयोग करें। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस घटना की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों की पहचान की जाए। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो “वन है तो हम हैं” केवल फाइलों का नारा बनकर रह जाएगा।
Also Read: थाने के अंदर आधी रात का तांडव! पुलिस स्टेशन में भड़की खौफनाक आग, धू-धू कर जले दर्जनों जब्त वाहन




















Total Users : 927277
Total views : 2675077