ड्रॉप-आउट छात्रों की खोज को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित
मयूरहंड (चतरा)। आकांक्षी प्रखंड मयूरहंड में शिक्षा की स्थिति को लेकर जिला प्रशासन सख्त नजर आ रहा है। 6 अप्रैल को आयोजित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में उपायुक्त कीर्तिश्री ने उच्च कक्षाओं में कम नामांकन पर गंभीर चिंता व्यक्त की। समीक्षा के दौरान सामने आया कि वर्ग 8 के बाद वर्ग 9 में छात्रों का नामांकन 97.92 प्रतिशत और छात्राओं का 102.47 प्रतिशत है, जबकि वर्ग 10 के बाद वर्ग 11 में यह आंकड़ा काफी कम होकर छात्रों का 33.15 प्रतिशत और छात्राओं का 39.66 प्रतिशत रह गया है। इस स्थिति को गंभीर मानते हुए उपायुक्त के निर्देश पर जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक एवं बीडीओ मयूरहंड की तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है, जिसे एक सप्ताह के भीतर जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। इसी क्रम में जिला शिक्षा पदाधिकारी दिनेश कुमार मिश्र ने गुरुवार को मयूरहंड सभागार में बैठक कर सभी विद्यालयों के शिक्षकों को वर्ग 9 एवं 11 के ड्रॉप-आउट छात्रों की पहचान करने का निर्देश दिया। साथ ही कक्षा 8 एवं 10 उत्तीर्ण छात्रों की ऑनलाइन सूची जिला कार्यालय को उपलब्ध कराने को कहा गया। हालांकि स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्षेत्र में बिना यू-डाइस कोड एवं गैर-मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों के संचालन से भी नामांकन प्रभावित हो रहा है। आरोप है कि कई छात्र-छात्राएं इन विद्यालयों के माध्यम से अन्य जिलों में नामांकन ले रहे हैं, जिससे सरकारी आंकड़ों में गिरावट दिख रही है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा विभाग को इन अवैध विद्यालयों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और प्रखंड स्तर पर नामांकन की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए। वहीं कुछ सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी भी सामने आई है। राजकीयकृत मध्य विद्यालय पंदनी एवं सरगांव में मात्र एक-एक शिक्षक होने की बात सामने आई, जिस पर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने जल्द व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया। अब देखना होगा कि प्रशासन की इस पहल से ड्रॉप-आउट छात्रों की वास्तविक स्थिति सामने आती है या फिर समस्या जस की तस बनी रहती है।
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