सहयोग और संवाद की राजनीति पर दिया जोर, सरकार से सत्र बढ़ाने की अपील
News Scale Live | नई दिल्ली
नई दिल्ली में राज्यसभा के विदाई सत्र के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने संबोधन में भावुक होते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि आज विदा ले रहे कुछ सांसद दोबारा सदन में लौटेंगे, जबकि कुछ को यह अवसर नहीं मिल पाएगा, लेकिन “राजनीति में रहने वाले लोग कभी रिटायर नहीं होते।”
नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन का जिक्र करते हुए बताया कि यह उनका पहला कार्यकाल था राज्यसभा में, जो अब पूरा होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें कई अनुभवी और विद्वान सांसदों के साथ काम करने का अवसर मिला, जो उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण अनुभव रहा।
अपने संबोधन में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवगौड़ा, वरिष्ठ नेता शरद पवार और डीएमके के वरिष्ठ सांसद तिरुचि सिवा के योगदान की सराहना की। साथ ही उन्होंने रामदास आठवले पर हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा कि वे हमेशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुणगान करते रहते हैं। उन्होंने दिग्विजय सिंह, के टी एस तुलसी, अभिषेक मनु सिंघवी समेत कई नेताओं के योगदान को भी सराहा। साथ ही महिला सांसदों जैसे रजनी पाटिल, फौजिया खान और प्रियंका चतुर्वेदी के कार्यों की भी प्रशंसा की।
खरगे ने सदन में सहयोग और संवाद की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि अच्छे कानून बनाने में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की बराबर की भूमिका होती है। उन्होंने अपील की कि नफरत की राजनीति से बचते हुए सहयोग की भावना से काम किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि संसद के सत्र की अवधि बढ़नी चाहिए, ताकि जनता के मुद्दों—जैसे गरीबों, किसानों और मजदूरों की समस्याओं—पर गंभीर चर्चा हो सके। साथ ही उन्होंने यह चिंता भी जताई कि कई बार विपक्ष के भाषणों के अंश कार्यवाही से हटा दिए जाते हैं, जिससे उनकी बातों का प्रभाव कम हो जाता है।
अपने भाषण के अंत में उन्होंने एक भावुक शायरी के साथ विदाई ले रहे सांसदों को शुभकामनाएं दीं— “विदाई तो है दस्तूर जमाने का पुराना… पर जहां भी जाना, अपनी छाप कुछ ऐसे छोड़ जाना…”



















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