उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के माधौगंज कस्बे में आयोजित एक सभा में पहुंचे ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने के अपने अभियान के लिए लोगों से जनसमर्थन की अपील की। उन्होंने कहा कि उनका यह अभियान किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है, बल्कि गोमाता के सम्मान और संरक्षण के लिए चलाया जा रहा है।
सभा स्थल पर पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का फूल-मालाओं से जोरदार स्वागत किया और पूजन-अर्चन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वह पूरे देश में जाकर मतदाताओं से सीधे संवाद कर रहे हैं और गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने के लिए समर्थन जुटा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब तक किसी भी सरकार ने गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने का कदम नहीं उठाया है, इसलिए अब जनता को स्वयं संकल्प लेना होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि अब तक चुनाव जाति, बिरादरी, सड़क, बिजली और पानी जैसे मुद्दों पर लड़े जाते रहे हैं, लेकिन आने वाले समय में चुनाव गौमाता के संरक्षण और सम्मान के मुद्दे पर होना चाहिए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि जो भी राजनीतिक दल या नेता गोमाता की रक्षा और उन्हें राष्ट्रमाता घोषित करने की बात करेगा, वे उसी का समर्थन करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी उनकी दुश्मन नहीं है, लेकिन अन्य राजनीतिक दल भी उनके मित्र नहीं हैं। उन्होंने देश में गौवंश की स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि गायें आखिर कहां जा रही हैं। साथ ही उन्होंने गौशालाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई और कहा कि कई स्थानों पर गायें भूखी-प्यासी तड़प रही हैं, जो बेहद दुखद है।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने बिहार के एक मौलाना द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की माता को लेकर की गई टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म या समुदाय को किसी की मां के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ की मां भी हम सबकी मां के समान हैं। अमेरिका को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ दुर्व्यवहार नहीं कर रहा है, बल्कि भारत की अपनी कुछ कमियां हैं, जिनके कारण देश को उसके सामने झुकना पड़ता है।
अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर दिए गए अपने पूर्व बयान पर उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा धर्मशास्त्र और शास्त्रों की मर्यादा के अनुसार ही अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि चाहे कांग्रेस, बसपा या सपा की सरकार रही हो, उन्होंने हमेशा धर्मशास्त्र के अनुसार ही अपनी राय व्यक्त की है। उन्होंने यह भी कहा कि शंकराचार्य किसी भी नेता के अनुयायी नहीं हो सकते और उनके इतने बुरे दिन नहीं आए हैं कि वे किसी नेता के चेले बन जाएं।





















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