इस साल होली की तारीख को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति है। वजह है — फाल्गुन पूर्णिमा दो दिन रहना, 3 मार्च को चंद्रग्रहण, और 2 मार्च की शाम से भद्राकाल लगना। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि होलिका दहन कब करें और रंगों की होली (धुलंडी) किस दिन खेलें?
आइए आसान भाषा में समझते हैं 👇
होलिका दहन कब होगा?
फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च की शाम 5:45 बजे से शुरू होकर 3 मार्च की शाम करीब 5 बजे तक रहेगी। परंपरा के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा की रात, सूर्यास्त के बाद और भद्राकाल रहित समय में किया जाता है।
❗ भद्राकाल की स्थिति
2 मार्च की शाम 5:45 बजे से भद्राकाल शुरू, 3 मार्च की सुबह 5:23 बजे तक रहेगा
विद्वानों के अनुसार:
2–3 मार्च की मध्यरात्रि में भद्रा पुच्छ काल (रात 1:16 से 2:25 बजे) होलिका दहन के लिए शुभ है। यदि इस समय संभव न हो, तो 3 मार्च को सूर्योदय से पहले सुबह 6:20 बजे तक दहन किया जा सकता है। अखिल भारतीय विद्वत परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. राजेश्वर शास्त्री मुसलगांवकर और काशी के विद्वानों ने भी 2 मार्च की रात को ही होलिका दहन शुभ बताया है। निष्कर्ष: होलिका दहन 2 मार्च की रात होगा।
चंद्रग्रहण का क्या असर है?
3 मार्च को चंद्रग्रहण दोपहर 3:21 बजे से शाम 6:47 बजे तक रहेगा। यह भारत में दिखाई देगा। ग्रहण से 9 घंटे पहले यानी सुबह 6:21 बजे से सूतक काल शुरू हो जाएगा।
सूतक और ग्रहण में क्या नहीं करें?
शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं, रंग-गुलाल खेलना अशुभ माना जाता है, इस समय मंत्र जाप और दान-पुण्य करना श्रेष्ठ माना गया है
रंगों की होली (धुलंडी) कब खेलें?
यहीं सबसे ज्यादा भ्रम है। दो मत सामने आ रहे हैं: 1️⃣ अधिकांश ज्योतिषियों की राय: चूंकि 3 मार्च को ग्रहण और सूतक रहेगा, इसलिए रंगों की होली 4 मार्च को खेलनी चाहिए। 2️⃣ कुछ पंचांगों और परंपरा के अनुसार: होलिका दहन 2 मार्च की रात होगा, तो लोक परंपरा के अनुसार 3 मार्च को होली खेल सकते हैं। मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई पंचांगों में 3 मार्च को ही धुलंडी बताई गई है।
🔥 होलिका दहन — 2 मार्च की रात 🎨 रंगों की होली — 4 मार्च (ग्रहण के कारण अधिकतर विद्वानों की सलाह) हालांकि कुछ स्थानों पर 3 मार्च को भी होली मनाई जा सकती है।



















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