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 गहने गिरवी रख पति को बचाने निकली पत्नी, मौत के सफर में भी साथ निभाया

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एक पत्नी का प्यार… पति की जिंदगी बचाने की जंग… और उम्मीदों से भरी उड़ान। लेकिन यह सफर मंजिल तक नहीं पहुंच सका। इलाज के लिए जुटाए गए लाखों रुपये और साथ निभाने का वादा, एक दर्दनाक हादसे में हमेशा के लिए थम गया।

चतरा/लातेहार। जिंदगी बचाने की जद्दोजहद एक दर्दनाक त्रासदी में बदल गई। चतरा में हुए एयर एंबुलेंस हादसे में लातेहार के ढाबा संचालक संजय और उनकी पत्नी अर्चना की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। बताया जाता है कि संजय की तबीयत गंभीर होने के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाया जा रहा था। पति की जान बचाने के लिए पत्नी अर्चना ने अपने गहने और जमीन गिरवी रखकर करीब आठ लाख रुपये जुटाए थे। परिवार को उम्मीद थी कि दिल्ली पहुंचते ही इलाज शुरू होगा और संजय की जान बच जाएगी।

लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। सिमरिया थाना क्षेत्र के जंगल में एयर एंबुलेंस क्रैश हो गया और पति-पत्नी दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। जिस पत्नी ने पति की जिंदगी बचाने के लिए हर संभव कोशिश की, वह अंतिम सफर में भी उनके साथ ही रही। परिजनों के अनुसार संजय परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। ढाबा चलाकर वे घर का खर्च चलाते थे। अचानक आई बीमारी ने परिवार को आर्थिक संकट में डाल दिया था, फिर भी अर्चना ने हिम्मत नहीं हारी। रिश्तेदारों और परिचितों से मदद लेकर किसी तरह रकम जुटाई, लेकिन यह प्रयास अधूरा रह गया। हादसे के बाद गांव में मातम पसरा है। दोनों के छोटे-छोटे बच्चों और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक परिवार के सपनों और संघर्षों का अंत है। यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि जीवन कितना अनिश्चित है। जिस सफर पर उम्मीदें टिकी थीं, वही सफर काल बन गया। पति को बचाने की कोशिश में निकली पत्नी ने आखिर तक साथ निभाया—मगर मंजिल तक पहुंचने से पहले ही दोनों की जिंदगी थम गई।

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