
इलाज की उम्मीद… परिवार की दुआएं… और आसमान में उड़ी जिंदगी बचाने वाली उड़ान। लेकिन झारखंड के चतरा में वही एयर एंबुलेंस कुछ ही पलों में भयावह हादसे का शिकार बन गई।
एक मरीज को दिल्ली ले जा रही एयर एंबुलेंस जंगल में गिरकर मलबे में बदल गई — और सात जिंदगियां हमेशा के लिए थम गईं।
चतरा/सिमरिया। मानव जीवन बचाने की कोशिश उस वक्त भयावह त्रासदी में बदल गई, जब गंभीर रूप से झुलसे मरीज को दिल्ली ले जा रही एयर एंबुलेंस सिमरिया थाना क्षेत्र के केंदू कसारी स्थित करमाटांड़ के जंगल में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस दर्दनाक हादसे में विमान में सवार सभी सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में एक ही परिवार के तीन सदस्य भी शामिल हैं।
आग से झुलसे थे संतोष साहू
प्राप्त जानकारी के अनुसार, चंदवा सरोज नगर निवासी संतोष साहू लगभग 65 प्रतिशत तक झुलस गए थे। सोमवार दोपहर बकोरिया गांव स्थित एक दुकान में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उनका इलाज रांची के देवकमल अस्पताल में चल रहा था, लेकिन हालत नाजुक होने पर डॉक्टरों ने उन्हें दिल्ली एम्स रेफर कर दिया। परिजनों ने करीब 8 लाख रुपये खर्च कर एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की थी, ताकि बेहतर इलाज मिल सके। लेकिन यह जीवनरक्षक उड़ान ही अंतिम सफर बन गई।
विमान में सवार थे ये लोग
एयर एंबुलेंस में संतोष साहू के साथ उनकी पत्नी बसंती देवी, भांजा ध्रुव, पायलट स्वराज दीप सिंह, सह-पायलट विवेक, मेडिकल टीम के डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता, नर्सिंग स्टाफ सचिन कुमार मिश्रा तथा डॉ. विकास भगत सवार थे। उड़ान के दौरान अचानक मौसम खराब होने की सूचना है। बताया जाता है कि प्रतिकूल मौसम में विमान संतुलन खो बैठा और सिमरिया के घने जंगल में क्रैश कर गया। हादसा इतना भीषण था कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
चार किलोमीटर पैदल चलकर निकाले गए शव
घटना की सूचना मिलते ही जिला पुलिस प्रशासन और एसएसबी 35वीं बटालियन के जवान मौके पर पहुंचे। दुर्घटनास्थल सड़क से लगभग चार किलोमीटर अंदर घने जंगल में था, जिससे राहत एवं बचाव कार्य बेहद कठिन रहा। जवानों ने कड़ी मशक्कत के बाद सभी शवों को बाहर निकाला और पैदल चार किलोमीटर लाकर एंबुलेंस से पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
क्षेत्र में शोक की लहर
इस हृदयविदारक घटना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। एक ही परिवार के तीन लोगों की असमय मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बेहतर इलाज की उम्मीद में 8 लाख रुपये खर्च कर दिल्ली ले जाया जा रहा मरीज रास्ते में ही काल के गाल में समा गया। यह हादसा न केवल एक परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र को झकझोर देने वाला साबित हुआ है। प्रशासन द्वारा दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।


















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