हजरत बाबा दुखन शाह के 101वें उर्स में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब, चादरपोशी कर मांगी अमन-चैन की दुआ

Anita Kumari
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लोहरदगाहजरत बाबा दुखन शाह के 101वें तीन दिवसीय सालाना उर्स के अवसर पर लोहरदगा में श्रद्धा, सूफियाना प्रेम और भाईचारे का अद्भुत नजारा देखने को मिला। इस पावन मौके पर विधायक रामेश्वर उरांव की ओर से उनके प्रतिनिधि निशिथ जायसवाल ने बाबा दुखन शाह की मजार पर चादरपोशी कर अकीदत के साथ दुआ मांगी और क्षेत्र की सुख-शांति, अमन-चैन एवं तरक्की की कामना की।

चादरपोशी के बाद विधायक रामेश्वर उरांव ने अपने संदेश में कहा कि बाबा दुखन शाह का उर्स आपसी भाईचारे, सद्भाव और इंसानियत का प्रतीक है। बाबा का संदेश प्रेम, सेवा और समानता का मार्ग दिखाता है, जो आज के समय में और भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि लोहरदगा की गंगा-जमुनी तहजीब सूफी संतों की उसी परंपरा की देन है, जिन्होंने बिना किसी भेदभाव के समाज को जोड़ने का कार्य किया। उर्स के अवसर पर दूर-दराज से आने वाले जायरीन और श्रद्धालु सामाजिक सौहार्द को और मजबूत करते हैं।

विधायक प्रतिनिधि निशिथ जायसवाल ने कहा कि बाबा दुखन शाह की दरगाह आस्था का ऐसा केंद्र है, जहां हर धर्म और समुदाय के लोग एक साथ माथा टेकते हैं। उन्होंने बताया कि विधायक रामेश्वर उरांव की ओर से चादरपोशी कर क्षेत्रवासियों की खुशहाली और शांति के लिए दुआ की गई। बाबा की शिक्षाएं हमें आपसी प्रेम, भाईचारे और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। उर्स मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का जीवंत उदाहरण है।

उर्स के दौरान मजार परिसर में विशेष दुआ, फातिहा और लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। प्रशासन एवं अंजुमन इस्लामिया के सहयोग से सुरक्षा एवं व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए, जिससे उर्स शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हो सका।

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