लोहरदगा। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलकर ‘जी-राम-जी’ किए जाने के निर्णय का भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य ओमप्रकाश सिंह ने पूर्ण समर्थन किया है। उन्होंने राज्य सरकार के विरोध को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसे राजनीतिक प्रेरित करार दिया। ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि मनरेगा केवल एक नाम नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के करोड़ों श्रमिकों की आजीविका, सम्मान और आत्मनिर्भरता से जुड़ी योजना है। केंद्र सरकार का यह निर्णय योजना को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जबकि राज्य सरकार बिना आत्ममंथन किए केवल विरोध की राजनीति में उलझी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में मनरेगा के तहत मजदूरी भुगतान में लगातार देरी, 100 दिन के रोजगार की गारंटी का उल्लंघन और पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायतें आम हो चुकी हैं। इन गंभीर मुद्दों पर जवाब देने के बजाय राज्य सरकार नामकरण को मुद्दा बनाकर अपनी प्रशासनिक विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।
भाजपा नेता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “जो सरकार श्रमिकों को समय पर मजदूरी नहीं दे पा रही है, उसे केंद्र के सुधारात्मक निर्णयों का विरोध करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।”
उन्होंने कहा कि ‘जी-राम-जी’ नामकरण भारत की सांस्कृतिक चेतना, श्रम की गरिमा और ग्रामीण विकास की मूल भावना को प्रतिबिंबित करता है। नाम बदलने से किसी भी लाभुक के अधिकारों में कोई कटौती नहीं हुई है और केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि योजना का मूल उद्देश्य और वित्तीय प्रावधान यथावत रहेंगे।
ओमप्रकाश सिंह ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह केंद्र के साथ टकराव की राजनीति छोड़कर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान दे। उन्होंने कहा कि समयबद्ध मजदूरी भुगतान, पारदर्शी कार्य आवंटन और टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण ही ग्रामीण मजदूरों का वास्तविक कल्याण सुनिश्चित कर सकता है। अंत में उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी केंद्र सरकार के उन सभी निर्णयों के साथ मजबूती से खड़ी है, जो परंपरा, विकास और जनहित के संतुलन पर आधारित हों। जनता अब नाम नहीं, नियत और परिणाम देखना चाहती है।








