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देशभर के आदिवासी प्रतिनिधियों से मिले मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, राष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष को नेतृत्व देने की उठी मांग

On: December 6, 2025 12:02 AM
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रांची (झारखंड): झारखंड की राजधानी रांची के कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय परिसर में आज देश के विभिन्न राज्यों से आए आदिवासी प्रतिनिधियों का मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान देशभर के आदिवासी समाज को एकजुट होकर अधिकारों की रक्षा और संघर्ष को तेज करने का संकल्प लिया गया। प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे देशव्यापी आदिवासी आंदोलन को नेतृत्व प्रदान करें, जिससे आदिवासी समाज की आवाज़ राष्ट्रीय मंच पर और अधिक प्रभावशाली ढंग से उठाई जा सके।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड की धरती हमेशा से वीरता, स्वाभिमान और संघर्ष की प्रतीक रही है। धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा से लेकर दिशोम गुरु शिबू सोरेन तक के संघर्ष ने आदिवासी अस्मिता को नई पहचान दी है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ने मानव सभ्यता के निर्माण और प्रकृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन आज भी यह समाज अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड सरकार आदिवासी समाज की संस्कृति, पहचान, शिक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि झारखंड आज देश का पहला राज्य है, जहां आदिवासी समाज के विद्यार्थी सरकारी खर्च पर विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जो पूरे देश के लिए एक मिसाल है। उन्होंने कहा कि “आदिवासी समाज में एक नई रोशनी जगी है, इसे और प्रखर करने के लिए सरकार हर कदम पर आपके साथ है।”

प्राकृतिक संतुलन पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति का उपासक है। जल, जंगल और जमीन आदिवासी जीवन की आत्मा है। लेकिन आधुनिक दौर में प्रकृति से छेड़छाड़ के कारण बाढ़, सूखा और भूस्खलन जैसी आपदाएं बढ़ी हैं। ऐसे में प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने यह भी कहा कि आने वाले समय में वे स्वयं देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर आदिवासी समाज के अस्तित्व और अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को अब केवल संघर्ष की आवाज़ नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के एजेंडे का हिस्सा बनना होगा।

इस अवसर पर गुजरात, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और मणिपुर सहित कई राज्यों से आए आदिवासी प्रतिनिधियों ने झारखंड सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। प्रतिनिधियों ने कहा कि झारखंड की पहल से पूरे देश में आदिवासी समाज के बीच नई ऊर्जा का संचार हुआ है।

कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिनिधियों ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन के त्याग, संघर्ष और योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही यह संकल्प लिया गया कि आदिवासी समाज के हक-अधिकार, संस्कृति और पहचान की रक्षा के लिए देशव्यापी आंदोलन को और मजबूती दी जाएगी।

इस अवसर पर मंत्री दीपक बिरुआ, मंत्री चमरा लिंडा, विधायक कल्पना सोरेन एवं अशोक चौधरी समेत सैकड़ों की संख्या में देश के अलग-अलग राज्यों से आए आदिवासी प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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