बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में उम्मीदवारों के नामांकन रद्द होने का क्रम लगातार जारी है। बुधवार को मोहनियां विधानसभा सीट से आरजेडी प्रत्याशी श्वेता सुमन का नामांकन रद्द हो गया है। नामांकन रद्द होने के बाद श्वेता सुमन फूट-फूटकर रोने लगीं। ज्ञात हो कि मंगलवार को महागठबंधन के एक और सहयोगी वीआईपी के कैंडिडेट शशिभूषण सिंह का सुगौली विधानसभा से नामांकन रद्द हो गया था। इससे पहले मढ़ौरा सीट से एलजेपी आर की कैंडिडेट सीमा सिंह का भी नामांकन रद्द हो गया था। इस तरह से अबतक तीन कैंडिडेट का नामांकन रद्द हो चुका है। जानकारी के अनुसार मोहनियां से कुल 17 लोगों ने नामांकन किया था। जिसमें बीते मंगलवार को चार व बुधवार को एक श्वेता सुमन का नामांकन रद हुआ है। इस तरह अब 12 प्रत्याशी हैं। गुरुवार को नाम वापसी के बाद स्पष्ट होगा कि चुनाव मैदान में कितने प्रत्याशी हैं। वहीं नामांकन रद्द होने के बाद आरजेडी प्रत्याशी ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि उनका नामांकन रद्द बीजेपी के कारण हुआ है। उन्होंने रोते हुए कहा कि बीजेपी कैंडिडेट का भी जाति प्रमाणपत्र लगा हुआ था लेकिन उनका हो गया मेरा नहीं हुआ। श्वेता सुमन ने कहा कि मैं यूपी कि हूं और आरोप लगाया गया था कि मेरा जाति प्रमाणपत्र यूपी का नहीं है। यानी मैं यहां की मूल निवासी नहीं हूं। उन्होंने दावा किया कि वो 20 साल से यहां रह रही हैं। चुनाव आयोग ने सुमन को यूपी का मूल निवासी मानते हुए उनका नामांकन रद्द कर दिया है। उल्लेखनीय है कि बिहार की किसी आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने के लिए कैंडिडेट का उस राज्य का मूल निवासी होना जरूरी है। मोहनिया से संगीता देवी बीजेपी के कैंडिडेट के तौर पर चुनाव लड़ रही हैं।
बीजेपी ने श्वेता का नामांकन रद्द करवाने के लिए चुनाव आयोग के पास पहुंची थी। बीजेपी का कहना था कि श्वेता मूल रूप से बिहार की निवासी नहीं है। इसलिए उनका नामांकन यहां से रद्द किया जाए। श्वेता ने खुद भी माना है कि वो यूपी से हैं। किसी भी सुरक्षित सीट पर बिहार में चुनाव लड़ने के लिए वहां का मूल निवासी होना जरूरी है।



















Total Users : 793963
Total views : 2490576