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गरीब का आशियाना ढहा, गर्भवती गाय की दबकर मौत, गरिबों का सपना कीचड़ और मिट्टी के नीचे दबकर टूट रहा है

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प्रतापपुर (चतरा)। सरकार कहती है कि देश का हर गरीब पक्के मकान में रहेगा, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि आज भी गरीब का सपना कीचड़ और मिट्टी के नीचे दबकर टूट रहा है। प्रतापपुर प्रखंड के कौरा गांव के भारती टोला में रविवार की रात तेज बारिश ने दो परिवारों का आशियाना और सकून की ज़िंदगी उजाड़ दी। रामदेव भारती का मिट्टी का घर अचानक ढह गया। हादसे में उसके घर में बंधी गर्भवती गाय दबकर मर गई। इस घटना में परिवार की जीविका छिन गई और दीवारें भी नहीं बचीं। अब इस परिवार के सामने रहने की समस्या बन गई है। इसी टोले में पूर्व मुखिया अर्जुन रजक का पुराना घर भी धराशायी हो गया। घर के साथ-साथ उसकी मेहनत से जुटाया गया प्याज का भंडार, और मवेशियों का चारा सब बर्बाद हो गया। पीड़ित रामदेव भारती के परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए गुहार लगाई, लेकिन उन्हें अब तक लाभ नहीं मिला। विडंबना यह है कि हादसे की सूचना मुखिया मालती देवी को दी गई, लेकिन उन्होंने मौके पर आना तो दूर, फोन तक उठाना उचित नहीं समझा। ग्रामीणों का आरोप है कि मुखिया की यही आदत है। गांव के लोग चाहे कितनी भी समस्या बताएं, वह न सुनती हैं, न कोई पहल करती हैं। अब सवाल यह है कि प्रधानमंत्री आवास योजना का हकदार आखिर कौन है? क्या उन लोगों को बार-बार घर गिरने, जानवर मरने और बच्चों को बरसात में भीगने के बाद भी आवास नहीं मिलेगा? क्या सरकार और पंचायत की योजनाएं सिर्फ कागज़ पर ही गरीबों तक पहुंचती हैं? पीड़ित परिवार की आंखों में आंसू और दिल में सवाल हैं। क्या गरीब होकर जीना ही हमारी नियति है?

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