अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-5 की अदालत ने सुनाया आजीवन कारावास का फैसला, अंधविश्वास में आकर 5 साल के मासूम समेत पूरे परिवार को टांगी से उतारा था मौत के घाट; वर्ष 2021 में हुई थी यह दिल दहला देने वाली वारदात
गुमला | न्यूज स्केल लाइव
झारखंड के गुमला जिले में अंधविश्वास और डायन-बिसाही के शक में घटित हुए बहुचर्चित कामडारा बुरुहातु नरसंहार मामले में बुधवार को न्यायपालिका का बड़ा और ऐतिहासिक हंटर चला है। जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-5 की अदालत ने इस जघन्य सामूहिक हत्याकांड पर विधिक फैसला सुनाते हुए कुल 7 आरोपियों को दोषी करार देकर उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है।
इस खौफनाक नरसंहार ने न केवल झारखंड प्रदेश, बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। अंधविश्वास में डूबे अपराधियों ने एक ही परिवार के 5 सदस्यों को उनके घर के भीतर घुसकर टांगी (कुल्हाड़ी) से बेरहमी से काट डाला था, जिसमें एक 5 साल का मासूम बच्चा भी शामिल था।
इन 7 दोषियों को अदालत ने सुनाई आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा
अदालत ने मामले की विधिक और वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट के आधार पर साक्ष्यों को सही पाते हुए कांड में शामिल सभी 7 आरोपियों को मुख्य रूप से दोषी पाया।
सजा पाने वाले दोषियों के नाम इस प्रकार हैं: अमृत टोपनो, डेनियल टोपनो, सावन टोपनो, फिरंगी टोपनो, सलीम टोपनो, सोमा टोपनो और फिलिप टोपनो।
माननीय न्यायालय ने इन सभी दोषियों को भादवि (IPC) की धारा 302/149 सहपठित 120-बी तथा धारा 460/149 सहपठित 120-बी के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 10,000 रुपये का नगद जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने अपने विधिक आदेश में स्पष्ट किया है कि अन्य धाराओं में दी गई अलग-अलग कारावास और जुर्माने की सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
23 फरवरी 2021 की खौफनाक रात; फुटबॉल मैदान में रची गई थी खूनी साजिश
इस सनसनीखेज वारदात की शुरुआत 23 फरवरी 2021 को कामडारा थाना क्षेत्र के बुरुहातु आमटोली गांव में हुई थी। घटना वाले दिन गांव के फुटबॉल मैदान में सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में एक अवैध सामाजिक पंचायत बुलाई गई थी। इस पंचायत में गांव के कुछ लोगों की बीमारी और असमय मौत के लिए 55 वर्षीय जोसफीना डहंगा और उनके पति निकोदीन टोपनो को जिम्मेदार ठहराया गया था। उन पर जादू-टोना (डायन-बिसाही) करने का झूठा आरोप मढ़ा गया था।
पंचायत खत्म होने के बाद रात होते ही इस अंधविश्वास ने एक सुनियोजित और खूनी रूप ले लिया। देर रात हथियारबंद हमलावरों ने पीड़ित परिवार के घर पर धावा बोल दिया। इसके बाद आरोपियों ने जोसफीना डहंगा, उनके पति निकोदीन टोपनो, 32 वर्षीय भीमसेंट टोपनो, उसकी पत्नी सिलवंती टोपनो और 5 वर्षीय मासूम बालक अलबिन टोपनो पर टांगी से ताबड़तोड़ वार कर दिए। हमलावरों ने परिवार के सिर, गर्दन और चेहरे पर इतने कड़े वार किए थे कि शवों की स्थिति देखकर पुलिस अधिकारी भी सिहर उठे थे। अपराधियों ने घर के किसी भी सदस्य को जीवित नहीं छोड़ा था।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई दोषियों की पेशी; समाज को गया कड़ा विधिक संदेश
इस भयानक नरसंहार के बाद तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर बालमुकुंद सिंह के लिखित बयान के आधार पर कामडारा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस की स्पेशल विंग ने मामले की त्वरित तफ्तीश शुरू की, जिसके बाद इस सामूहिक हत्याकांड की परतें खुलती चली गईं। सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने भी इस घटना पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया था।
बुधवार को जब अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गुमला मंडल कारा (जेल) में बंद सभी 7 आरोपियों की पेशी के बाद यह विधिक फैसला सुनाया, तो बुरुहातु गांव के लोगों के जेहन में वह खौफनाक मंजर दोबारा ताजा हो गया। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि अदालत का यह फैसला समाज में व्याप्त अंधविश्वास के खिलाफ एक कड़ा विधिक संदेश है। हालांकि, इस ऐतिहासिक न्याय को देखने के लिए पीड़ित परिवार का एक भी सदस्य आज इस दुनिया में जीवित नहीं बचा है।




















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